मुंबई: केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्री थावर चंद गहलोत ने गुरुवार को कहा कि एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) कानून पर केंद्र की पुनर्विचार याचिका को लेकर यदि उच्चतम न्यायालय का फैसला सरकार के रूख के अनुकूल नहीं आता है तो केंद्र सरकार एक अध्यादेश जारी करेगी. Also Read - अमि‍त शाह, जेपी नड्डा के साथ मीटिंग में चिराग पासवान ने नीतीश को लेकर शिकायतों पर रखी अपनी बात

डॉ भीमराव आंबेडकर की 127 वीं जयंती मनाने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में गहलोत ने कहा कि इस कानून को लेकर संदेह का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है. Also Read - असम भर्ती घोटाला: मुख्य आरोपी बीजेपी नेता ने किया आत्मसमर्पण, भाजपा ने पार्टी से निकाला

गहलोत ने कहा कि पुनर्विचार याचिका पर यदि शीर्ष न्यायालय का फैसला सरकार के रूख के अनुकूल नहीं आता है तो ‘ हम एक अध्यादेश जारी करेंगे.’ Also Read - रवि किशन को दी गई Y+ श्रेणी की सुरक्षा, जान से मारने की मिली थी धमकी

उन्होंने आरक्षण में बदलाव के लिए सरकार का कोई इरादा नहीं होने का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘हमें स्पष्ट करने दीजिए कि हमारा इरादा न तो अतीत में ऐसा कभी था, ना ही हम अब ऐसा कर रहे हैं, ना ही हम भविष्य में ऐसा करेंगे.’’

सरकारी नौकरियों में पदोन्नति में आरक्षण के विषय पर गहलोत ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर विचार कर रही है और वह आश्वस्त करना चाहते हैं कि आखिरी नतीजा आरक्षित श्रेणियों के पक्ष में आएगा.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने गत 20 मार्च को दिए गए एक आदेश में एससी-एसटी कानून के तहत तुरंत गिरफ्तारी और फौरन मुकदमा दर्ज किए जाने पर रोक लगा दी थी.

क्या था फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट के तहत तुरंत गिरफ्तारी नहीं किए जाने का आदेश दिया था. एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज होने वाले केस में अग्रिम जमानत को भी मंजूरी दे दी थी. अदालत ने कहा था कि इस कानून के तहत दर्ज मामलों में तुरंत गिरफ्तारी की बजाय पुलिस को 7 दिन के भीतर जांच करनी चाहिए और फिर आगे एक्शन लेना चाहिए.

शीर्ष अदालत ने कहा था कि सरकारी अधिकारी की गिरफ्तारी अपॉइंटिंग अथॉरिटी की मंजूरी के बिना नहीं की जा सकती. गैर-सरकारी कर्मचारी की गिरफ्तारी के लिए एसएसपी की मंजूरी जरूरी होगी.