नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कारोबारी का अपहरण कर उत्तर प्रदेश की जेल में उसकी पिटाई के मामले में पूर्व सांसद अतीक अहमद को मंगलवार को गुजरात स्थानांतरित करने का निर्देश दिया. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने देवरिया की जेल में हुई इस घटना पर कड़ा रूख अपनाया और सारे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो को जांच करने का आदेश दिया.पीठ ने अतीक अहमद के खिलाफ विभिन्न अदालतों में लंबित 26 मामलों के अलावा उसके खिलाफ दर्ज 80 दूसरे मामलों के बारे में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश भी राज्य सरकार को दिया.

बता दें कि न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया ने इससे पहले की अपनी रिपोर्ट में कहा था कि अतीक अहमद के खिलाफ 1979 से 2019 के दौरान 102 मामले दर्ज हुए. इनमें हत्या के 17, उप्र गैंगस्टर कानून के तहत 12, शस्त्र अधिनियम के तहत आठ और उप्र गुंडा कानून के तहत चार मामले भी शामिल हैं. पांच बार विधायक और एक बार सांसद रहे अतीक अहमद 11 फरवरी, 2017 से जेल में बंद है.

पीठ ने जेल के पांच अधिकारियों को निलंबित करने का भी आदेश दिया. पहली नजर में इस मामले में इन अधिकारियों की संलिप्तता की वजह से उत्तर प्रदेश सरकार ने इनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू कर रखी है. पीठ ने अतीक अहमद के खिलाफ विभिन्न अदालतों में लंबित 26 मामलों के अलावा उसके खिलाफ दर्ज 80 दूसरे मामलों के बारे में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश भी राज्य सरकार को दिया.

इससे पहले, मामले की सुनवाई शुरू होते ही न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया ने इस मामले में अपनी पांचवी रिपोर्ट न्यायालय में पेश की. उन्होंने पीठ से कहा कि जेल में अहमद से मुलाकातियों के लिये मुलाकात के नियमों में ढील दी गई थी.

लखनऊ के कारोबारी मोहित जायसवाल ने 28 दिसंबर, 2018 को दर्ज कराई गई प्राथमिकी में आरोप लगाया था कि उन्हें जेल ले जाया गया जहां बंद डान और उसके साथियों ने उसकी पिटाई की और उसका कारोबार अपने नाम हस्तांतरित करा लिया.

यूपी सरकार ने 11 अप्रैल को शीर्ष अदालत को बताया था कि देवरिया जेल में बंद अतीक अहमद ने निश्चित ही पिछले साल 26 दिसंबर को जायसवाल का अपहरण कराया था और उसकी पिटाई की थी. राज्य सरकार ने इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा था कि घटना वाले दिन जेल परिसर में सीसीटीवी कैमरों के साथ छेड़छाड़ की गई थी.