नई दिल्‍ली: सुप्रीम कोर्ट उन्‍नाव रेप पीडि़ता के मामले में बुधवार को संज्ञान लेने के बाद गुरुवार दोहपर को अहम निर्देश दिए हैं. सीजेआई रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पीठ ने मामले में पीड़ि‍ता को राहत देते हुए उससे जुड़े सभी पांच मामलों को दिल्‍ली की कोर्ट में स्‍थानांतरित करने, हादसे में घायल पीड़िता और उसके वकील को 25-25 लाख रुपए देने, उसके परिवार को सुरक्षा देने और त्‍वरित जांच करने और फैसले का निर्देश दिया है. बता दें कि शीर्ष कोर्ट ने बलात्कार पीड़िता द्वारा सीजेआई को लिखे पत्र पर बुधवार को संज्ञान लिया था और अपने सेक्रेटरी जनरल से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी कि इस पत्र को 17 जुलाई से अब तक उनके संज्ञान में क्यों नहीं लाया गया.

हादसे की जांच 7 दिन में, रेप केस की 45 दिन में सुनवाई
सीजेआई ने आदेश में कहा कि कार को ट्रक के टक्कर मारने की घटना की जांच सात दिन में पूरी की जाए. न्यायालय ने इस प्रकरण से जुड़े पांच मामले उन्नाव से बाहर दिल्ली की सक्षम अदालत में स्थानांतरित करने का आदेश दिया. सीजेआई ने कहा कि उन्नाव बलात्कार मामले के मुकदमे की सुनवाई 45 दिन में पूरी की जाए.

सीबीआई को एक पखवाड़े से अधिक का समय नहीं
उन्‍नाव रेप पीड़िता के एक्‍सीडेंट केस में सीजेआई ने कहा कि एक्‍सीडेंट की जांच 7 दिन के अंदर की जाए. फिर भी अपवाद स्‍वरूप सीबीआई एक सप्‍ताह और ले सकती है. लेकिन किसी भी परिस्‍थति में जांच एक पखवाड़े से अधिक बढ़ाई नहीं जाएगी.

पीड़िता और वकील को 25-25 लाख दे यूपी सरकार
चीफ जस्टिस ने कहा, हमने विक्‍ट‍िम को आंतरिक राहत देने के बारे में भी विचार किया है. हमने अंतरिम कदम उठाते हुए उत्‍तर प्रदेश सरकार को रेप पीड़िता को और उसके वकील को 25-25 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए.

परिवार और वकील को पर्याप्‍त सुरक्षा मिले
सीजेआई ने कहा, हमने निर्देश दिया है कि पीड़िता, उसके वकील, रेप पीड़िता, उसकी मां और पीड़िता के परिवार के चार लोगों और उसके चाचा को तत्‍काल सुरक्षा दी जाए.

पत्र में देरी का जांच जज की देख-रेख में
सीजेआई ने सेक्रेटरी जनरल द्वारा 7 दिन में जांच की जाएगी. इसमें सीजेआई द्वारा नामित सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की देखरेख में ये सुनिश्‍चत करने के लिए होगी कि क्‍या रजिस्‍ट्रार ऑफिस के अधिकारियों की चूक/ लापरवाही के चलते उन्‍नाव रेप विक्‍टिम की मां के द्वारा सीजेआई को लिखे गए पत्र की प्रोसेसिंग में देरी हुई है.