
Tanuja Joshi
हल्द्वानी से दिल्ली के बड़े न्यूजरूम तक... तनुजा जोशी, उत्तराखंड के शांत और खूबसूरत शहर हल्द्वानी से ताल्लुक रखती हैं. देहरादून के ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी ... और पढ़ें
Maharashtra Transport Strike: महाराष्ट्र में ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जुड़े लाखों ड्राइवरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया है. इस हड़ताल में स्कूल बस, ट्रक, टैक्सी, ऑटो और कई अन्य कमर्शियल व्हीकल वाहन शामिल हो सकते हैं. ट्रांसपोर्ट यूनियन का कहना है कि ई-चालान सिस्टम में भारी जुर्माने और नियमों के कारण उन्हें आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही है.
इस विरोध प्रदर्शन को ट्रांसपोर्ट संगठनों ने ‘चक्का जाम’ का नाम दिया है. अगर हड़ताल लंबी चली तो इसका असर आम लोगों की यात्रा, माल ढुलाई और छात्रों के स्कूल आने-जाने पर पड़ सकता है. चलिए इस हड़ताल से जुड़ी अहम बातें आसान भाषा में समझते हैं.
इस हड़ताल में ट्रांसपोर्ट सेक्टर के कई बड़े वर्ग शामिल हो सकते हैं. इसमें स्कूल बस ड्राइवर, ट्रक ड्राइवर, टैक्सी चालक, ऑटो रिक्शा चालक और माल ढुलाई से जुड़े वाहन चालक शामिल हैं. इसके अलावा प्राइवेट बस, टेम्पो, टैंकर, कर्मचारी परिवहन बसें, टूरिस्ट कैब और ऐप-आधारित टैक्सी सेवाओं से जुड़े ड्राइवर भी इस आंदोलन का हिस्सा बन सकते हैं. ट्रांसपोर्ट संगठनों का दावा है कि ये मुद्दा राज्य के लगभग 15 लाख से ज्यादा ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों को प्रभावित कर रहा है.
ये राज्यव्यापी हड़ताल 5 मार्च की आधी रात से शुरू होने की घोषणा की गई है. ट्रांसपोर्ट यूनियनों और सरकार के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका. इस आंदोलन को ट्रांसपोर्ट संगठन महाराष्ट्र परिवहन कार्रवाई समिति (M-TAC) के नेतृत्व में किया जा रहा है. यूनियन नेताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया जाता तब तक हड़ताल जारी रह सकती है.
ड्राइवरों और ट्रांसपोर्ट कंपनियों का मुख्य विरोध ई-चालान प्रणाली को लेकर है. उनका कहना है कि कई मामलों में भारी जुर्माना लगाया जा रहा है और इन चालानों को चुनौती देना भी आसान नहीं है. ट्रांसपोर्ट यूनियन के अनुसार राज्य में लंबित ई-चालानों की कुल राशि लगभग 4500 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. उनका दावा है कि इससे छोटे ड्राइवरों और परिवहन व्यवसाय पर बड़ा आर्थिक दबाव पड़ रहा है.
हड़ताल कर रहे संगठनों ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं. इनमें सबसे प्रमुख मांग ई-चालान सिस्टम में बदलाव और पुराने चालानों को माफ करने की है. इसके अलावा व्यावसायिक वाहनों पर लगने वाले टैक्स और टोल को कम करने की मांग भी की गई है.
यूनियन का कहना है कि वाहन ट्रैकिंग डिवाइस, हाई-सिक्योरिटी नंबर प्लेट, सीसीटीवी और अन्य सुरक्षा उपकरण लगाने की लागत भी बहुत ज्यादा है. कुछ संगठनों ने शहरों में लागू ‘नो एंट्री’ नियमों को भी ढीला करने की मांग की है. साथ ही हाईवे पर चेक पोस्ट हटाने और ड्राइवरों के लिए आराम केंद्र बनाने की भी मांग की गई है.
अगर हड़ताल में बड़े पैमाने पर ड्राइवर शामिल होते हैं तो इसका असर सबसे ज्यादा बड़े शहरों में देखने को मिल सकता है. मुंबई और पुणे जैसे शहरों में टैक्सी, ऑटो और बस सेवाओं के प्रभावित होने से यात्रियों को परेशानी हो सकती है. वहीं ट्रकों के बंद रहने से माल ढुलाई भी बाधित हो सकती है. स्कूल बस मालिकों के संगठन ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया है. हालांकि, शुरुआत में बसें चलने की संभावना बताई गई थी, लेकिन यदि हड़ताल लंबी चली तो छात्रों को दिक्कत हो सकती है.
ई-चालान एक डिजिटल ट्रैफिक जुर्माना प्रणाली है. जब कोई वाहन ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करता है, तो कैमरा, स्पीड गन या पुलिस के उपकरण के जरिए उसका रिकॉर्ड बन जाता है. इसके बाद गाड़ी नंबर के आधार पर डिजिटल चालान जारी किया जाता है. इसमें गाड़ी नंबर, समय, स्थान और नियम उल्लंघन की जानकारी होती है. वाहन मालिक को ये चालान SMS या ई-मेल के जरिए भेजा जाता है. इसके बाद जुर्माना ऑनलाइन भरना होता है.
अगर हड़ताल लंबे समय तक जारी रहती है तो आम लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. ऑटो और टैक्सी कम होने से यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है. बस सेवाएं प्रभावित होने से ऑफिस जाने वाले लोगों को भी मुश्किल हो सकती है. इसके अलावा ट्रकों के बंद रहने से बाजारों में सामान की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है.
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