श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त करने तथा राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेश में बांटने को लेकर राज्य में पैदा हुए तनाव की स्थिति अब धीरे-धीरे सामान्य हो रही है. सरकार ने कश्मीर घाटी में शांति-व्यवस्था के ताजा हालात के मद्देनजर सोमवार से स्कूल-कॉलेज और सरकारी दफ्तर खोलने का फैसला किया है. हालांकि जम्मू में हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं. कश्मीर घाटी के 50 पुलिस थाना क्षेत्रों में रविवार को प्रतिबंधों में ढील दी गई. हालांकि, श्रीनगर के कुछ हिस्सों में हिंसा की छिटपुट घटनाओं के बाद प्रतिबंधों को और कड़ा कर दिया गया. इस बीच, जम्मू क्षेत्र के पांच जिलों में इंटरनेट सेवाओं की बहाली के एक दिन बाद इसे फिर से बंद कर दिया गया.

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इसके अलावा, रविवार को जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने घाटी के 10 और टेलीफोन एक्सचेंजों का परिचालन शुरू कर दिया. हालांकि, पहले बहाल 17 एक्सचेंज में से एक पर सेवाएं रोक दी गई हैं. अधिकारियों ने बताया कि प्रशासन को लैंड लाइन फोन का इस्तेमाल दुष्प्रचार अभियान में करने की जानकारी मिलने के बाद एक एक्सचेंज पर सेवाएं फिर से रोकी गई हैं. उन्होंने बताया कि घाटी में मौजूद 50,000 टेलीफोन फिक्स्ड लाइन में 28,000 को चालू कर दिया गया है. रविवार को जिन टेलीफोन एक्सचेंज का परिचालन शुरू किया है वे हैं श्रीनगर जिले में डल झील, सचिवालय और निशात, उत्तरी कश्मीर में पट्टन, बोनियार और बारामूला, बडगाम जिले के चाबुरा और चरार-ए-शरीफ एवं दक्षिण कश्मीर की ऐशमुकाम.

इधर, घाटी में हालात सामान्य करने की दिशा में प्रयासरत अधिकारियों ने बताया कि 300 हज जायरीनों का पहला जत्था रविवार को सउदी अरब से कश्मीर वापस लौटा. उन्होंने बताया कि जायरीनों की सुरक्षित घर वापसी के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे. सरकारी प्रवक्ता रोहित कंसल ने रविवार की शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया, ‘‘निषेधाज्ञा में ढील देने की प्रक्रिया जारी है. प्रदेश के 50 पुलिस थाना क्षेत्रों में आज प्रतिबंधों में ढील दी गई, जबकि कल 35 थाना क्षेत्रों में ऐसा किया गया था.’’ कंसल ने बताया कि सोमवार से नया हफ्ता शुरू हो रहा है और हम इसे नई आशा के साथ देख रहे हैं. उन्होंने बताया, ‘‘अकेले श्रीनगर में 190 से अधिक प्राथमिक स्कूल कल दोबारा खुल रहे हैं और इसके बाद हम दूसरे क्षेत्रों की ओर देख रहे हैं, जैसे हम विकास से संबंधित गतिविधि शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं.’’

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रोहित कंसल ने कहा कि रविवार को छूट की अवधि भी छह घंटे से बढ़ाकर आठ घंटे कर दी गई. उन्होंने बताया, ‘‘छूट की घोषणा करने से लोगों और दुकानदारों को पहले से योजना बनाने में मदद मिली. कल की प्रतिक्रिया के मद्देनजर और व्यापारियों द्वारा अनुरोध को ध्यान में रखते हुए छूट के घंटों में वृद्धि की गई. यह प्रक्रिया आने वाले दिनों में भी जारी रहेगी.’’ सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि कुछ इलाकों में कुछ शरारती तत्वों द्वारा ‘दुकानदारों के साथ गुंडागर्दी करने’ और उनकी दुकानों को बंद करने की खबरें थीं. उन्होंने बताया, ‘‘कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने इसका संज्ञान लिया है. जिन इलाकों में प्रतिबंधों में छूट दी गई है उन क्षेत्रों में किसी भी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है. हालांकि, गड़बड़ी की दो-तीन घटनाओं की खबरें है जिसमें दो व्यक्ति घायल हुए हैं और जिनकी हालत स्थिर बतायी गई है.’’ उन्होंने बताया कि घाटी के विभिन्न हिस्सों में प्रतिबंध आज रविवार को 14 वें दिन भी जारी रहा.

अधिकारी ने बताया कि शहर के कुछ स्थानों समेत घाटी में विभिन्न स्थानों में शनिवार को प्रतिबंधों में ढील दी गई थी, जहां कुछ गड़बड़ी की घटनाएं हुईं. इसके बाद कुछ इलाकों में पुन: प्रतिबंध लगा दिया गया. उन्होंने बताया कि लगभग एक दर्जन स्थानों पर प्रदर्शन किया गया जिसमें कुछ प्रदर्शनकारी घायल हो गए. उन्होंने बताया कि घायलों की वास्तविक संख्या की जानकारी उपलब्ध नहीं है. कंसल ने कहा कि शनिवार की शाम घाटी में छह स्थानों पर प्रदर्शन किया गया जिसमें आठ लोग घायल हो गए थे. अधिकारियों ने बताया कि शहर के कई इलाकों में लैंडलाइन टेलीफोन सेवाएं बहाल कर दी गई हैं और यह प्रक्रिया जारी है. वहीं, जम्मू क्षेत्र में, कम गति वाले 2 जी मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को एक बार फिर से पांच जिलों में रविवार को बंद कर दिया गया, ताकि इन सेवाओं को बहाल करने के एक दिन बाद अफवाह फैलाने वालों की जांच की जा सके. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि अधिकारियों ने संबंधित सेवा प्रदाताओं को दोपहर से पहले इंटरनेट सेवाओं को बंद करने के लिए कहा.

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आपको बता दें कि लगभग एक पखवाड़े तक निलंबित रहने के बाद शुक्रवार और शनिवार की मध्यरात्रि को जम्मू क्षेत्र के पांच जिलों – जम्मू, सांबा, कठुआ, उधमपुर और रियासी – में कम गति वाली मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बहाल कर दी गईं थीं. जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त करने तथा राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेश में बांटने से पहले चार अगस्त को मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया गया था. सरकार की ओर से यह कदम उठाए जाने से कुछ घंटे पहले पूरे प्रदेश में कर्फ्यू जैसे प्रतिबंध लागू कर दिए गए थे. हालांकि, प्रतिबंधों में बाद में ढील दी गई थी.

(इनपुट – एजेंसी)