नई दिल्‍ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देश के नाम पर संबोधन के दौरान एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा करते हुए कहा है कि वैज्ञानिक कहते हैं कि यह कोरोना लंबे समय तक हमारी जिंदगी का हिस्‍सा बना रहेगा. लेकिन हम अपने जीवन को कोरोना के आसपास ही सीमित नहीं रहने दे सकते हैं. हम मास्क पहनेंगे और सोशल डिस्‍टेंसिंग में संतुलन बनाए रखेंगे, लेकिन इसे हम खुद को प्रभावित नहीं होने देंगे. इसलिए लॉकडाउन 4 नए नियमों के साथ नए रूप में होगा. पीएम मोदी ने कहा कि लॉकडाउन 4 नए नियमों वाला होगा, आपको 18 मई से पहले इसके बारे में बता दिया जाएगा. Also Read - केजरीवाल सरकार का बड़ा फैसला- दिल्ली के अस्पताल में दिल्लीवासियों का होगा इलाज, बाहरी लोगों का नही

पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा, लेकिन थकना, हारना, टूटना-बिखरना, मानव को मंजूर नहीं है. सतर्क रहते हुए, ऐसी जंग के सभी नियमों का पालन करते हुए, अब हमें बचना भी है और आगे भी बढ़ना है. आज जब दुनिया संकट में है, तब हमें अपना संकल्प और मजबूत करना होगा. हमारा संकल्प इस संकट से भी विराट होगा. Also Read - अफगानिस्तान के शीर्ष क्रिकेटरों ने काबुल में शुरू किया अभ्यास

पीएम मोदी ने कहा, लेकिन थकना, हारना, टूटना-बिखरना, मानव को मंजूर नहीं है. सतर्क रहते हुए, ऐसी जंग के सभी नियमों का पालन करते हुए, अब हमें बचना भी है और आगे भी बढ़ना है. आज जब दुनिया संकट में है, तब हमें अपना संकल्प और मजबूत करना होगा. हमारा संकल्प इस संकट से भी विराट होगा.

पीएम ने कहा साथियों, हम पिछली शताब्दी से ही सुनते आए हैं कि 21वीं सदी हिंदुस्तान की है. हमें कोरोना से पहले की दुनिया को, वैश्विक व्यवस्थाओं को विस्तार से देखने-समझने का मौका मिला है. कोरोना संकट के बाद भी दुनिया में जो स्थितियां बन रही हैं, उसे भी हम निरंतर देख रहे हैं. जब हम इन दोनों कालखंडो को भारत के नजरिए से देखते हैं तो लगता है कि 21वीं सदी भारत की हो,

पीमए ने कहा ये हमारा सपना नहीं, ये हम सभी की जिम्मेदारी है. लेकिन इसका मार्ग क्या हो? विश्व की आज की स्थिति हमें सिखाती है कि इसका मार्ग एक ही है- “आत्मनिर्भर भारत”. हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है- एष: पंथा: यानि यही रास्ता है- आत्मनिर्भर भारत.

पीएम ने कहा साथियों, एक राष्ट्र के रूप में आज हम एक बहुत ही अहम मोड़ पर खड़े हैं. इतनी बड़ी आपदा, भारत के लिए एक संकेत लेकर आई है, एक संदेश लेकर आई है, एक अवसर लेकर आई है. मैं एक उदाहरण के साथ अपनी बात रखूंगा. जब कोरोना संकट शुरू हुआ, तब भारत में एक भी पीपीई किट नहीं बनती थी. एन-95 मास्क का भारत में नाममात्र उत्पादन होता था. आज स्थिति ये है कि भारत में ही हर रोज 2 लाख PPE और 2 लाख एन-95 मास्क बनाए जा रहे हैं. ये हम इसलिए कर पाए, क्योंकि भारत ने आपदा को अवसर में बदल दिया. आपदा को अवसर में बदलने की भारत की ये दृष्टि, आत्मनिर्भर भारत के हमारे संकल्प के लिए उतनी ही प्रभावी सिद्ध होने वाली है.