नई दिल्ली: रेलवे अपनी सेवाओं में कमियों पर अंकुश लगाने के लिए स्टेशनों और ट्रेनों में गुमनाम जांच दल तैनात करने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है.एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी. ये लोग सामान्य यात्री जैसे नजर आएंगे लेकिन वे ट्रेनों एवं स्टेशनों पर खाने-पीने की चीजें, कर्मचारियों के आचरण, गुणवत्ता आदि सुविधाओं पर पैनी नजर रखेंगे और कामकाज के आधार पर उनका मूल्यांकन (रेंटिंग) करेंगे. ऐसी ही व्यवस्था 20वीं सदी में अमेरिका और ब्रिटेन में कंपनियों ने कर्मचारियों के मानकों का मूल्यांकन करने के लिए विकसित की थी. अब यह बड़ी कंपनियों के लिए उपभोक्ताओं की दृष्टि से उनकी सेवाओं का मूल्यांकन करने की चुनी हुई प्रक्रिया है.

क्या है प्लानिंग
अधिकारी ने कहा, ‘यह उन विभिन्न प्रस्तावों में एक है जिन पर रेलवे बोर्ड अपनी सेवाओं की निगरानी के लिए फिलहाल विचार कर रहा है. बारीकियों को फिलहाल अंतिम रुप नहीं दिया गया है. अधिकारी ने बताया कि ‘गुप्त खरीददार के लिए निश्चित मापदंड होंगे जिसके आधार पर वे सुविधाओं का मूल्यांकन करेंगे. उसके लिए वे यात्रियों, कर्मचारियों, अन्य अधिकारियों से बात करेंगे और फिर अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे. अधिकारी के अनुसार बोर्ड इस पर भी गौर कर रहा है कि क्या इस काम में भारतीय गुणवत्ता परिषद की मदद ली जा सकती है.

यात्रा बीमा योजना से कंपनियां मालामाल
सूचना के अधिकार (आरटीआई) से खुलासा हुआ है कि पिछले दो वित्तीय वर्षों में ऑनलाइन रेल टिकट बुक कराने वालों के बीमा यात्रा से निजी कंपनियों की बंपर कमाई हुई है. इन दो सालों में 43.57 करोड़ लोगों के यात्रा बीमा के बदले निजी क्षेत्र की तीन अनुबंधित कम्पनियों ने 37.14 करोड़ रुपये का प्रीमियम कमाया. हालांकि, इन कंपनियों ने इस अवधि में केवल 48 बीमा दावा मामले स्वीकृत किये जिनमें संबंधित लोगों को 4.34 करोड़ रुपये का मुआवजा अदा किया गया. मध्य प्रदेश के नीमच निवासी सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने बताया कि इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (आईआरसीटीसी) के एक संयुक्त महाप्रबंधक ने उन्हें आरटीआई के तहत यह जानकारी दी है.