नई दिल्ली. हरियाणा की एक लोकल कोर्ट ने गुरुवार को कथित संत रामपाल को हत्या के दो मामले में दोषी माना है. अतिरिक्त सेशन कोर्ट ने साल 2014 के मामले में राम पाल को दोषी ठहराया है. इसे देखते हुए हिसार में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. Also Read - Rajasthan: तांत्र‍िक ने यौन शोषण के Video Viral क‍िए, 4 पीड़ित महिलाओं से लाखों रुपए भी ठग ल‍िए

पहले केस में रामपाल और उसके फॉलोवर पर हत्या और गलत तरीक से बंधक बनाने का मामला है. इसमें हिसार के बरवाला के सतलोक आश्रम में 19 नवंबर 2014 को चार महिलाओं और उनके बच्चे मृत अवस्था में पाए गए थे. दूसरे मामले में 18 नवंबर को रामपाल के एक आश्रम में एक महिला मृत पाई गई थी. इस केस में भी रामपाल और उनके फॉलोवर्स को हत्या का दोषी ठहराया गया है. इस मामले में 80 गवाह थे, जिन्होंने ट्रायल के दौरान गवाही दी है.

कौन है रामपाल?
संत रामपाल दास का जन्म हरियाणा के सोनीपत के गोहाना तहसील के धनाना गांव में हुआ था. पढ़ाई पूरी करने के बाद रामपाल को हरियाणा सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर की नौकरी मिल गई. इसी दौरान इनकी मुलाकात स्वामी रामदेवानंद महाराज से हुई. रामपाल उनके शिष्य बन गए और कबीर पंथ को मानने लगे.

21 मई, 1995 को रामपाल ने 18 साल की नौकरी से इस्तीफा दे दिया और सत्संग करने लगे. उनके समर्थकों की संख्या बढ़ती चली गई. कमला देवी नाम की एक महिला ने करोंथा गांव में बाबा रामपाल दास महाराज को आश्रम के लिए जमीन दे दी. 1999 में बंदी छोड़ ट्रस्ट की मदद से संत रामपाल ने सतलोक आश्रम की नींव रखी.

2006 में स्वामी दयानंद की लिखी एक किताब पर संत रामपाल ने एक टिप्पणी की. आर्यसमाज को ये टिप्पणी बेहद नागवार गुजरी और दोनों के समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हुई. घटना में एक शख्स की मौत भी हो गई. इसके बाद एसडीएम ने 13 जुलाई, 2006 को आश्रम को कब्जे में ले लिया और रामपाल को उनके 24 समर्थकों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया.