नई दिल्ली/चंडीगढ़. वरिष्ठ अधिवक्ता और आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता एच.एस. फूलका ने गुरुवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया. फूलका ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी है. इस साल लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस और आप के बीच गठबंधन की संभावना को लेकर चल रही अटकलों के बीच यह कदम सामने आया है. फूलका ने एक ट्वीट कर कहा कि वह शुक्रवार को दिल्ली में एक प्रेस कान्फ्रेंस में इस कदम के पीछे की वजह बताएंगे. उन्होंने टि्वटर पर लिखा, ‘‘मैंने आप से इस्तीफा दे दिया और आज केजरीवाल जी को इस्तीफा सौंप दिया. हालांकि उन्होंने मुझे इस्तीफा ना देने के लिए कहा लेकिन मैं इस पर कायम रहा. कल शाम चार बजे नई दिल्ली के रायसीना रोड पर प्रेस क्लब में मीडिया को आप छोड़ने की वजह और आगे की योजनाओं के बारे में बताऊंगा.’’

वकील से नेता बने फूलका ने 2015 में पंजाब में बेअदबी के मामलों में आरोपियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने की मांग को लेकर अक्टूबर में आप विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था. वह लुधियाना की दाखा सीट से विधायक थे. उन्होंने यह दावा करते हुए विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था कि पंजाब में कांग्रेस सरकार ने बेअदबी की घटनाओं पर न्यायाधीश रंजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट में नामित लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं की. आप ने कांग्रेस के साथ गठबंधन की संभावनाओं को खारिज नहीं किया. आप ने कहा कि उसकी राजनीतिक मामलों की समिति दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के कायकर्ताओं तथा अपने नेताओं की राय पर विचार करने के बाद कोई फैसला लेगी.

इससे पहले नई दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के साथ बैठक में आप नेताओं और पंजाब के कार्यकर्ताओं के एक वर्ग ने कांग्रेस के साथ गठबंधन की किसी भी संभावना पर चिंता जताई. पंजाब में आप मुख्य विपक्षी दल है लेकिन 2017 में पंजाब विधानसभा चुनाव के बाद निर्वाचित हुए 20 प्रत्याशियों में से आठ ने पिछले साल सुखपाल सिंह खैरा के नेतृत्व में एक बागी समूह बना लिया था. फूलका ने पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता के पद से भी इस्तीफा दे दिया था, ताकि वह अदालतों में 1984 के सिख रोधी दंगों के पीड़ितों का प्रतिनिधित्व कर सकें. सूत्रों ने दावा किया कि फूलका किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल हो सकते हैं लेकिन उन्होंने अभी पुष्टि नहीं की.