नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में सरकार के गठन की अटकलों के बीच, भारतीय जनता पार्टी के विधायकों और वरिष्ठ पार्टी नेताओं ने मंगलवार को जम्मू में एक महत्वपूर्ण बैठक की. कुछ सांसदों को छोड़कर, बैठक में सभी वरिष्ठ पार्टी नेता मौजूद थे, इस बैठक की अध्यक्षता जम्मू-कश्मीर बीजेपी के अध्यक्ष रविंद्र रैना की. इस बैठक में राज्य में आगामी पंचायत और शहरी निकाय चुनावों पर भी चर्चा हुई. हमारे सहयोगी डीएनए को सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में सरकार बनाने को लेकर भी चर्चा हुई. हालांकि इस मुद्दे पर कोई आमराय नहीं बन पाई. बीजेपी के कुछ नेताओं का कहना था कि पूर्व सहयोगी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) से अलग होने के बाद जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करने के लिए काम करने की जरूरत है. सरकार बनाने की बजाय पार्टी को इस पर ध्यान देना चाहिए. Also Read - कांग्रेस ने सामूहिक पलायन पर सरकार से पूछे सवाल, कहा- गरीबों की जिंदगी मायने रखती है या नहीं

वहीं कुछ नेताओं का कहना था कि पार्टी को जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने की संभावनाओं की तलाश करनी चाहिए क्योंकि राज्य का विकास रूक गया है. राज्य में सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी को 44 विधायकों की जरूरत पड़ेगी. मौजूदा 87 सदस्यीय विधानसभा में, पीडीपी 28 सदस्यों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है. वहीं बीजेपी के पास 25 विधायक हैं. जबकि एनसीपी के 15, कांग्रेस के 12, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के दो और सीपीआई-एम और पीडीएफ के एक-एक विधायक है. वहीं अन्य निर्दलीय विधायक हैं. Also Read - केजरीवाल ने लोगों को गीता पाठ करने की दी सलाह, कहा- गीता के 18 अध्याय की तरह लॉकडाउन के बचे हैं 18 दिन 

इस बीच, जम्मू-कश्मीर में संवाद के लिए केंद्र के विशेष प्रतिनिधि दिनेश्वर शर्मा ने बुधवार को राजभवन में गवर्नर सत्यपाल मलिक से मुलाकात की. एक आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा कि गवर्नर और शर्मा ने आंतरिक सुरक्षा स्थिति, विकास परिदृश्य और युवाओं के शैक्षिक और करियर हितों की रक्षा और प्रचार के लिए आवश्यक पहल से संबंधित कई मुद्दों पर चर्चा की. Also Read - यूपी: रायबरेली में सोनिया गांधी के 'लापता' होने के लगे पोस्टर, संसदीय क्षेत्र से बाहर होने पर उठे सवाल

गौरतलब है कि 19 जून को बीजेपी ने पीडीपी से समर्थन वापस ले लिया था. इसके बाद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. गठबंधन से हाथ वापस खींचने को लेकर बीजेपी ने कहा था कि जिन उद्देश्यों को लेकर गठबंधन सरकार बनाई गई थी, वो पूरे नहीं हुए. हमने शांति के लिए गठबंधन किया था. घाटी में हालात बेहद खराब हो गए हैं. फ्रीडम ऑफ स्पीच और प्रेस की आजादी खतरे में है. बीजेपी का कहना था कि कश्मीर में जो काम करना चाह रहे थे, वो नहीं कर पा रहे थे. रमजान में ऑपरेशन रोकने के बावजूद अपेक्षित नतीजे नहीं निकल पाए. इसका फायदा उठाने की कोशिश की गई. देशहित और राज्य के हित में समर्थन वापसी का फैसला लिया गया है.