नई दिल्ली: कुछ समय पहले केंद्रीय जांच ब्यूरों के दो अफसरों के बीच हुए विवाद के बाद केंद्र सरकार ने दोनों अफसरों को छुट्टी पर भेज दिया था, लेकिन मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के फैसले को पलट दिया. इसके बाद सरकार की ओर से सफाई पेश करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि सीबीआई के सीनियर अफसरों को छुट्टी में भेजने का फैसला केंद्रीय सर्तकता आयोग की अनुशंसा पर किया गया था. सरकार इस मामले में कोर्ट के फैसले का पालन करेगी.

वित्त मंत्री जेटली ने मंगलवार को कहा कि सीबीआई के दो वरिष्ठ अधिकारियों को छुट्टी पर भेजने का सरकार का निर्णय केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की अनुशंसा पर लिया गया था. सुप्रीम कोर्ट सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को पद पर बहाल करने का फैसला सुनाये जाने के बाद संसदीय परिसर में मीडियाकर्मियों से जेटली ने कहा कि सरकार शीर्ष अदालत के आदेशों का अनुपालन करेगी.

बता दें कि वर्मा को केंद्र सरकार के 23 अक्टूबर के फैसले के बाद छुट्टी पर भेज दिया गया था और वह 31 जनवरी को सेवानिवृत्त होने वाले हैं.

वर्मा और सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेजे जाने के निर्णय का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा, ”सरकार ने यह फैसला सीबीआई की संप्रभुता को बचाए रखने के लिए किया.सरकार ने सीबीआई के दो वरिष्ठ अधिकारियों को छुट्टी पर भेजे जाने की कार्रवाई सीवीसी की अनुशंसा पर की थी.” उन्होंने कहा कि न्यायालय ने एक हफ्ते के भीतर फैसला लेने के लिए मुद्दे को समिति के पास भेज दिया है.

जेटली ने कहा, ”सीबीआई की निष्पक्ष एवं भेदभाव रहित कार्यशैली के व्यापक हित को देखते हुए न्यायालय ने स्पष्ट तौर पर सीबीआई निदेशक को मिली सुरक्षा को मजबूत किया है. साथ ही साथ न्यायालय ने जवाबदेही की व्यवस्था का रास्ता भी निकाला है. न्यायालय के निर्देशों का निश्चित तौर पर अनुपालन होगा.”

वर्मा के अधिकार वापस ले लेने के केंद्र को फैसले को दरकिनार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने वर्मा की बहाली कर दी, लेकिन उनपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की सीवीसी जांच खत्म होने तक उन्हें कोई भी बड़ा नीतिगत फैसला लेने से रोक दिया. शीर्ष अदालत ने कहा कि वर्मा के खिलाफ आगे कोई भी फैसला उच्चाधिकार प्राप्त समिति लेगी जो सीबीआई निदेशक का चयन एवं नियुक्ति करती है.