मेंगलुरु: कर्नाटक में मेंगलुरु की एक अदालत ने ‘साइनाइड’ मोहन को केरल के कासरगोड जिले की रहने वाली युवती के साथ दुष्कर्म और हत्या का दोषी ठहराया है. यह मोहन के खिलाफ दर्ज 20वां और आखिरी मामला है. उसने कई महिलाओं से दोस्ती कर उनका बलात्कार किया और फिर साइनाइड जहर धोखे से खिलाकर उनकी हत्या कर दी.Also Read - Sheena Bora Murder Case: इंद्राणी मुखर्जी ने किया दावा, मेरी बेटी शीना बोरा जिंदा है और कश्‍मीर में है

बता दें कि मोहन ने साइनाइड खिलाकर 20 महिलाओं की हत्या करना स्‍वीकार कर चुका है. सीरियल किलर मोहन को 2009 में बंतवाल से गिरफ्तार किया गया था. मोहन ने साइनाइड जहर देकर 20 महिलाओं की हत्या करने की बात कुबूल की थी. Also Read - Bihar: CISF जवान की पत्‍नी के मर्डर में खुलासा, शूटरों से मरवाने वाले पति समेत 5 अरेस्‍ट

सजा का ऐलान 24 जून को किए जाने की उम्मीद है. अभियोजन के मुताबिक, कासरगोड के एक महिला छात्रावास में खानसामे का काम करने वाली 25 वर्षीय युवती की 2009 में मोहन से जान पहचान हुई. Also Read - पत्रकार बुद्धिनाथ झा हत्या मामलाः पुलिस का दावा, 'लव ट्रायंगल के चलते हुआ मर्डर'; परिवार ने ‘मेडिकल माफिया’ पर लगाए आरोप

बता दें फरवरी 202 में कर्नाटक की एक अदालत ने ‘साइनाइड’ देकर महिलाओं को मारने वाले कुख्यात सीरियल किलर मोहन को केरल के कसारगोड की 23 वर्षीय युवती की हत्या के 19 वें मामले में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. जबकि इससे पहले पांच मामलों में मोहन को मौत की सजा और तीन अन्य मामलों में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है.

वह पीड़िता के घर पर तीन बार गया और उससे शादी करने का वादा किया. आठ जुलाई 2009 को महिला यह कर अपने घर से निकली कि वह मंदिर जा रही है.

मोहन युवती को कर्नाटक के बेंगलुरु ले गया और जब पीड़िता के परिवार के सदस्यों ने उसे फोन कर युवती के बारे में पूछा तो उसने बताया कि उन्होंने शादी कर ली है और जल्द लौटेंगे. वह युवती को बस स्टैंड के करीब एक लॉज में ले गया.

अभियोजन ने बताया कि अगले दिन वह युवती को बस स्टैंड लेकर गया जहां उसे साइनाइड मिली दवा खाने को दी और खुद मौके से फरार हो गया. युवती दवा खाने के बाद वहीं गिर पड़ी और उसे एक कांस्टेबल अस्पताल ले कर गया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया. इसके बाद अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज किया गया.

अक्टूबर 2009 में मोहन को गिरफ्तार कर लिया गया. इसके बाद पीड़िता की बहन ने उसकी तस्वीर देखकर उसे पहचान लिया और उसके खिलाफ मामला दर्ज किया. इसके बाद अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने मामले की जांच शुरू की.