नई दिल्ली। 2012 निर्भया गैंगरेप के दोषियों की फांसी की सजा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है. शीर्ष अदालत ने तीन दोषियों विनय शर्मा, मुकेश सिंह और पवन गुप्ता की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया. चौथे आरोपी अक्षय ठाकुर ने याचिका नहीं दी थी. इन चारों को दिल्ली हाई कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने मई 2017 में भी बरकरार रखा था. फैसले पर निर्भया के मां-बाप ने संतुष्टि जताई और जल्द से जल्द इन्हें फांसी पर लटकाने की अपील की. Also Read - तमिलनाडु सरकार मेडिकल प्रवेश में ओबीसी आरक्षण पर जल्द फैसले को लेकर पहुंची सुप्रीम कोर्ट  

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फैसला आने के बाद निर्भया के पिता बद्रीनाथ सिंह ने कहा, हमें पता था कि उनकी याचिका खारिज होगी. लेकिन अब आगे क्या होगा? अब तक काफी समय बीत चुका है और महिलाओं को खतरा बढ़ता ही जा रहा है. मुझे भरोसा है कि जल्द उन्हें फांसी होगी.

वहीं, निर्भया की मां आशा देवी ने कहा, वे नाबालिक नहीं हैं. दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्होंने इस तरह का अपराध किया है. इस फैसले से अदालत पर हमारा विश्वास और बढ़ा है कि आखिर में इंसाफ मिलकर ही रहेगा. साथ ही आशा देवी ने कहा कि हमारा संघर्ष यहां खत्म नहीं होगा. न्याय मिलने में देरी हो रही है. इससे समाज की महिलाओं का नुकसान हो रहा है. मैं न्यायपालिका से अपील करती हूं कि न्यायिक तंत्र को मजबूत बनाएं. गुनहगारों को जल्द से जल्द फांसी पर लटकाकर निर्भया को इंसाफ दें.

16 दिसंबर 2012 की घटना

ये चारों 16 दिसंबर, 2012 में चलती बस में 23 साल की पैरा-मेडिकल छात्रा निर्भया से गैंगरेप और उसकी हत्या के आरोपी हैं. घटना के 13 दिनों बाद सिंगापुर के एक अस्पताल में निर्भया की मौत हो गई थी. अभियुक्तों के वकील ने याचिका में कहा था कि असली अपराधियों को गिरफ्तार करने में असफल होने के बाद पुलिस ने निर्दोष लोगों को फंसाया. शीर्ष अदालत ने पांच मई, 2017 को चार अभियुक्तों की मौत की सजा को बरकरार रखा था.