नई दिल्ली: कांग्रेस सेवा दल की एक पुस्तक में वीर सावरकर और नाथूराम गोडसे के बीच कथित संबंध को लेकर किए गए उल्लेख पर विवाद खड़ा होने के बाद संगठन के प्रमुख लालजी देसाई ने शुक्रवार को कहा कि संगठन को सावरकर के ‘माफी मांगने और दो राष्ट्र के उनके सिद्धांत’ को लेकर आपत्ति है.

दरअसल, सेवा देल ने भोपाल में अपने प्रशिक्षण शिविर में ‘वीर सावरकर कितने वीर’ नाम पुस्तक का वितरण किया है. इसमें डॉमिनिक लैपिएर और लैरी कॉलिन की किताब ‘फ्रीडम एट मिडनाइट’ का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि सावरकर और महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे के बीच समलैंगिक संबंध थे.

कांग्रेस के फ्रंटल संगठन के प्रमुख देसाई ने यह भी कहा कि यह पुस्तक एक साल पहले की है और इसमें ‘फ्रीडम एट मिडनाइट’ नामक किताब का हवाला दिया गया है, हालांकि इस पर मीडिया का ध्यान अब गया है.

बीजेपी ने सेवा दल की पुस्तक में सावरकर के बारे में किए गए दावे को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि कांग्रेस तुच्छ राजनीति कर रही है. महाराष्ट्र में कांग्रेस की सहयोगी शिवसेना ने भी सेवा दल की पुस्तक पर आपत्ति जताते हुए कहा कि महाराष्ट्र और पूरे देश को सावरकर पर गर्व है.

इस पुस्तक से जुड़े विवाद के बारे में पूछे जाने पर देसाई ने कहा, ”हमने एक साल पहले अपने राष्ट्रीय अधिवेशन में यह पुस्तक निकाली थी. इस पर मीडिया का ध्यान अब गया है. हमने कोई टिप्पणी नहीं की. हमने ‘फ्रीडम एट मिडनाइट’ में जो लिखा है, उसी का हवाला दिया है.”

देसाई ने कहा, ”सावरकर के बारे में हमारी जो राय पहले थी, वही अब भी है. उनके 11 बार माफी मांगने वाली बात पूरी दुनिया जानती है. कोई भी क्रांतिकारी गोली खाता है, लेकिन माफी नहीं मांगता है. इस बात को लेकर हमें दिक्कत है.  दो  राष्ट्र जो सिद्धांत दिया था, उसको लेकर भी हमें आपत्ति है.”

भाजपा महासचिव अनिल जैन ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस तुच्छ राजनीति कर रही है और भाजपा इस स्तर पर नहीं गिरेगी. मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं सांसद राकेश सिंह ने कांग्रेस सेवा दल के कार्यक्रम में सावरकर को लेकर बांटे गए साहित्य पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, कांग्रेस मतिभ्रम के दौर से गुजर रही है. वह समझ नहीं पा रही कि किसका विरोध करें और किसका समर्थन करें.

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि इस दौर में कांग्रेस के नेता उन राष्ट्र भक्तों को निशाना बनाने से नहीं चूक रहे जो राष्ट्रभक्त विशेष रूप से बहुसंख्यक आबादी के हितचिंतक रहे हैं.