नई दिल्ली: पुलिस ने एक जॉब रैकेट का भंडाफोड़ किया है जो ओएनजीसी में जॉब दिलाने के नाम पर लोगों को ठगता था. इतना ही नहीं युवाओं के फर्जी इंटरव्यू के लिए उच्च सुरक्षा वाले कृषि भवन के सरकारी अधिकारियों के कमरे का इस्तेमाल होता था. रैकेट चलाने वाले में सॉफ्टवेयर इंजिनियर, ऑनलाइन स्कॉलरशिप फर्म का डायरेक्टर, एक ग्राफिक डिजाइनर, एक टेकी और एक इवेंट मैनेजर शामिल था. इन लोगों की मंत्रालय के स्टाफ से मिलीभगत थी. गैंग ने बहुत ही जबरदस्त इंतजाम कर रखे थे. यह रैकेट पिछले तीन साल में 25-30 लोगों को करोड़ों रुपये का चूना लगा चुका है.

गैंग ने ग्रामीण विकास मंत्रालय के फोर्थ श्रेणी के दो कर्मचारियों को गैंग का हिस्सा बना लिया था. ये मल्टीटास्किंग स्टाफ था जो कृषि भवन में हर तरफ एक्सेस कर सकता था. दोनों कर्मचारी उस अधिकारी के खाली कमरे का बंदोबस्त करते थे, जो छुट्टी पर होते थे. गैंग के सदस्य खुद को ओएनजीसी का बोर्ड मेंबर बताते और इंटरव्यू लेते थे. इसके बाद युवाओं को फर्जी जॉब लेटर्स दिया जाता था. इसके बाद उम्मीदवारों से रैकेट का मास्टरमाइंड पैसा लेता था.

हाल ही में उनलोगों ने छात्रों के एक ग्रुप से 22 लाख रुपये ठग लिए. इस संबंध में ओएनजीसी की ओर से वसंत कुंज थाने में शिकायत दर्ज कराई गई कि ओएनजीसी में असिस्टेंट इंजिनियर के पद पर नौकरी दिलाने के नाम पर उनलोगों को ठगा गया है. मामला दर्ज करके क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया. दो महीनों की जांच के बाद पुलिस को गैंग का पर्दाफाश करने में सफलता मिली. एडिशनल कमिशनर (क्राइम) राजीव रंजन ने बताया, ‘हमने आरोपियों से 27 मोबाइल फोन, 2 लैपटॉप, 10 चेकबुक, फर्जी आईडी कार्ड्स और 45 सिम कार्ड्स बरामद किए हैं. जांच के दौरान पता चला कि पीड़ितों को ओएनजीसी के ऑफिशल मेल से ईमेल आए थे और कृषि भवन में इंटरव्यू लिया गया था.

आरोपियों की पहचान 32 वर्षीय किशोर कुणाल, 28 वर्षीय वसीम, 32 वर्षीय अंकित गुप्ता, 27 वर्षीय विशाल गोयल और 32 वर्षीय सुमन सौरभ के तौर पर हुई है. मंत्रालय के स्टाफ की पहचान 58 वर्षीय जगदीश राज और 31 वर्षीय संदीप कुमार के तौर पर हुई है. वसीम, अंकित और विशाल उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं जबकि बाकी आरोपी दिल्ली के हैं. अन्य मुख्य आरोपी रवि चंद्रा की तलाश जारी है.