नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने ‘तहलका’ पत्रिका के संस्थापक तरुण तेजपाल की वह याचिका सोमवार को खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले में तय आरोपों को रद्द करने की मांग की थी. तेजपाल पर उनकी एक पूर्व महिला सहकर्मी ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था.

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा के नेतृत्व वाली एक पीठ ने गोवा की निचली अदालत को तेजपाल के खिलाफ दर्ज मामले में सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर 6 महीने के भीतर पूरी करने का आदेश भी दिया. कोर्ट ने 6 अगस्त को तेजपाल की याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा था.

तेजपाल पर आरोप है कि उन्होंने 2013 में गोवा के एक पांच सितारा होटल के एलिवेटर में अंदर पूर्व महिला सहकर्मी का यौन उत्पीड़न किया था. ‘तहलका’ पत्रिका के संस्थापक ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है.

अदालत द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद तेजपाल को अपराध शाखा ने 30 नवंबर 2013 को गिरफ्तार किया था. वह मई 2014 से जमानत पर बाहर हैं.

गोवा पुलिस ने दावा किया था कि उनके पास घटना के समय के कुछ व्हाट्सऐप मैसेज और ईमेल हैं, जो तेजपाल के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त हैं.

तरुण तेजपाल के खिलाफ तय आरोपों को निरस्त करने के लिए दायर याचिका का विरोध करते हुए पुलिस ने कहा था कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सामग्री है.

बंबई हाई कोर्ट ने भी 20 दिसंबर 2017 को तेजपाल की उसके खिलाफ तय आरोप खारिज करने की याचिका रद्द कर दी थी. इसके बाद ही उन्होंने शीर्ष अदालत का रुख किया था.