नई दिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि कुछ अमीर और शक्तिशाली लोग न्यायालय के कामकाज को नियंत्रित करना चाहते हैं. न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अगुवाई वाली पीठ ने प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई के खिलाफ लगे यौन उत्पीड़न से संबंधित मामले की तीसरी बार सुनवाई के दौरान यह बात कही. अदालत ने कहा कि इन ‘फिक्सरों’ को अवश्य ही जाना चाहिए.

पीठ ने कहा, “धनाढ्य लोग सर्वोच्च न्यायालय की रजिस्ट्री चलाना चाह रहे हैं..यह बहुत गंभीर मामला है… अगर सच को बाहर लाया गया तो लोगों को मारा जा सकता है या हानि पहुंचाई जा सकती है.” न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि यह जानने के बाद कि एक कथित नेटवर्क सर्वोच्च न्यायालय को अपने हिसाब से चलाना चाहता है, ‘हम बहुत पीड़ा में हैं.’ उन्होंने यह भी कहा कि पीठ को यह पता चला है कि इन फिक्सरों का प्रतिनिधित्व प्राय: सर्वोच्च न्यायालय के शीर्ष वकील करते हैं. न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा, “हम इस देश के अमीर और शक्तिशाली लोगों से कहना चाहते हैं कि वे सर्वोच्च न्यायालय नहीं चला सकते.”

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सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व कर्मचारी ने प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ कथित रूप से यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है, जिसके बाद वकील उत्सव बैंस ने आरोप लगाया कि प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ साजिश रची जा रही है. बैंस ने अदालत में नया शपथपत्र दाखिल किया है. इस शपथ पत्र को पढ़ने के बाद पीठ ने अपनी टिप्पणी की. इस बीच वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने विरोध करते हुए कहा कि पीठ यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे प्रधान न्यायाधीश के बचाव में दिए गए तथ्यों में अधिकांश समय खपा रही है.

उन्होंने कहा कि जांच में इस तरह के प्रभाव से प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ अदालत की पूर्व कर्मचारी की शिकायत को हानि पहुंच सकती है. पीठ ने उन्हें आश्वस्त किया कि दोनों जांच स्वतंत्र रूप से होंगी. पीठ ने पाया है कि कुछ ‘फिक्सर’ जो प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला के रिश्तेदार होने का दावा कर रहे हैं, वे प्रधान न्यायाधीश को हटाने के लिए उत्सव बैंस के पास गए. पीठ ने कहा, “हम इस व्यक्ति की पहचान नहीं जानते हैं… हमें सच का पता लगाने की जरूरत है.”