
Shivendra Rai
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले शिवेन्द्र राय को हिंदी डिजिटल पत्रकारिता में 5 साल का अनुभव है. वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से इतिहास में एमए ... और पढ़ें
Prayagraj Magh Mela: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दावा किया है कि मौनी अमावस्या के मौके पर प्रयागराज माघ मेले के दौरान राज्य प्रशासन ने उन्हें संगम नोज की ओर जाने से रोक दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें संगम घाट जाते समय बीच रास्ते में रोक दिया. स्थिति यह हो गई कि मुझे और मेरे अनुयायियों को पवित्र स्नान किए बिना ही वापस अपने अखाड़े में लौटने के लिए मजबूर किया गया.
शंकराचार्य के अनुसार, उनकी पालकी को बीच रास्ते में रोक दिया गया क्योंकि सीनियर पुलिस अधिकारियों ने कथित तौर पर उनके शिष्यों को धक्का दिया और उनके साथ बदसलूकी भी की. उन्होंने दावा किया कि मौजूदा हालात को देखते हुए, उन्होंने आगे न बढ़ने का फैसला किया और वापस लौट गए.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी कहा कि परिस्थितियों को देखते हुए, वह मौनी अमावस्या पर पवित्र स्नान नहीं करेंगे. राज्य प्रशासन द्वारा स्थिति को संभालने के तरीके पर अपनी नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि अधिकारियों के व्यवहार ने उन्हें पीछे हटने पर मजबूर कर दिया.
पत्रकारों से बात करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि अब स्थिति यह है कि हमें पवित्र स्नान करने से रोका जा रहा है। देखते हैं आगे क्या होता है. प्रशासन जो चाहे कर सकता है. हमने अपने लोगों से वापस लौटने के लिए कहा है, क्योंकि प्रशासन इस प्रक्रिया को रोक रहा है. हमारे आगे बढ़ने का कोई कारण नहीं है. हम प्रशासन का समर्थन कर रहे हैं.
उन्होंने आगे कहा कि हमें कोई समस्या नहीं है. लेकिन अब यह प्रशासन पर निर्भर है कि वह हमें बताए कि क्या गलत है. बता दें कि मौनी अमावस्या प्रयागराज में चल रहे माघ मेले का तीसरा और सबसे बड़ा स्नान दिवस है और परंपरा के अनुसार इसमें साधु-संतों और भक्तों की भारी भीड़ होती है. रविवार सुबह से ही घने कोहरे और ठंड के मौसम के बावजूद बड़ी संख्या में तीर्थयात्री पवित्र स्नान करने के लिए संगम घाट पहुंचे थे.
माघ मास की अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या भी कहते हैं. यह सनातन धर्म में विशेष दिन है. इस दिन श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान करते हैं, दान-पुण्य करते हैं और मौन व्रत धारण करते हैं. यह दिन ईश्वर के साथ-साथ पूर्वजों की आराधना के लिए भी बेहद खास माना जाता है.
अमावस्या 18 जनवरी को रात 1 बजकर 21 मिनट से शुरू होकर 19 जनवरी तक रहेगी. धार्मिक मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन मौन रहकर साधना, पूजा और ध्यान करना विशेष फलदायी होता है. इस पावन तिथि पर देवता और पूर्वज धरती पर आते हैं. माघ मास की यह अमावस्या प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में स्नान के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है. यह दिन आत्मिक शुद्धि, पाप मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति का भी अवसर है.
मौनी अमावस्या पर दान-पुण्य और पूजा-पाठ का विशेष महत्व है. इस दिन संभव हो सके तो नदी में स्नान करना चाहिए. यदि आपके घर के पास नदी नहीं है तो त्रिवेणी का ध्यान कर घर में स्नान करने से नदी में स्नान करने का फल मिलता है. मौन रहकर ध्यान और ईश्वर की आराधना करें. पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध करें और उन्हें काले तिल, कुश और जल से दक्षिण दिशा मुख करके अर्घ्य दें. पीपल के वृक्ष की पूजा और परिक्रमा का भी विशेष विधान है.
धर्म शास्त्र कहते हैं कि इस दिन किया दान-पुण्य कई गुना फल देता है. अपनी सामर्थ्य अनुसार काले तिल, गुड़, घी, अन्न, चावल, आटा, गर्म कपड़े, पका हुआ भोजन, फल, धन दान करना चाहिए. गरीबों, ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को भोजन कराना भी पुण्य देता है. ये दान गुप्त रूप से करना उत्तम माना जाता है. भगवान विष्णु और शिव की पूजा भी करें.
(इनपुट- एजेंसी)
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