शंकर सिंह वाघेला… एक ऐसा नाम जो एक जमाने से गुजरात की राजनीति का जरूरी हिस्सा रहा है. पहले गुजरात बीजेपी के दिग्‍गज नेता और अब कांग्रेसी शंकर सिंह वाघेला ने शुक्रवार को अपने 77वें जन्‍मदिन पर अहम घोषणा करते हुए कहा कि पार्टी ने मुझे 24 घंटे पहले ही निकाल दिया है. गुजरात विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस को यह कदम कितना महगा पड़ेगा इसका आंकलन हम जरूर करेंगे लेकिन पहले जान लेते हैं गुजरात में ‘बापू’ के नाम से मशहूर शंकर सिंह वाघेला के 40 सालों का दिलचस्प सियासी सफरनामा… (यह भी पढ़ेंः जन्मदिन पर शंकर सिंह वाघेला का सियासत से संन्यास का ऐलान, कांग्रेस को किया ‘मुक्त’)

  • शंकर सिंह वाघेला 40 सालों से भी ज्यादा समय से राजनीति में सक्रिय हैं. कभी उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राजनीतिक गुरु माना जाता था.
  • वाघेला एकमात्र ऐसे नेता हैं जो बीजेपी और कांग्रेस दोनों के अध्यक्ष रह चुके हैं. अक्टूबर 1996 से अक्टूबर 1997 तक वाघेला गुजरात के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं.
  • शंकर सिंह वाघेला ने कुल 6 बार लोकसभा का चुनाव लड़ा था. 3 बार वह सांसद बने थे. गुजरात के दिग्गज नेता वाघेला साल 1977 में पहली बार सांसद बने थे. 1975 में इमरजेंसी के वाघेला जेल भी जा चुके हैं.
  • आरएसएस और  जनसंघ की पृष्ठभूमि से आए वाघेला 1980-91 तक गुजरात बीजेपी के महासचिव और अध्यक्ष रहे.
  • 1984-89 तक राज्यसभा सदस्य और 1989-96 तक लोकसभा सदस्य भी रहे. गुजरात में उनका अपना जनाधार है.
  • 1996 लोकसभा चुनावों में गोधरा से हार गए. और इसी साल बीजेपी छोड़ दी.
  • 1996 में राष्ट्रीय जनता पार्टी का गठन हुआ. इसी साल कांग्रेस के समर्थन से मुख्यमंत्री बने. 1997 में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया और 1998 में राष्ट्रीय जनता पार्टी का कांग्रेस में विलय हो गया.
  • 1999 और 2004 में कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़े और जीते. उन्हें केंद्र सरकार में कपड़ा मंत्री बनाया गया था.
  • 2009 और 2014 लोकसभा चुनाव हार गए. फिलहाल गुजरात विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं.

वाघेला की राजनीतिक महात्वाकांक्षा उन्हें एकबार फिर उसी मोड़ पर ले आई है जहां 22 साल पहले उन्होंने बगावत की थी. सितंबर 1995 में 47 विधायकों के साथ वाघेला ने बीजेपी नेतृत्व से बागवत की थी. 1996 में उन्हें लोकसभा में हार का मुंह देखना पड़ा तो उन्होंने नई पार्टी बना ली जिसका नाम राष्ट्रीय जनता पार्टी रखा. उस वक्त कांग्रेस के समर्थन से साल भर के लिए मुख्यमंत्री भी बने. हालाकि बाद में उस पार्टी का कांग्रेस में विलय हो गया. आज उनकी राजनीतिक महात्वाकांक्षा उन्हें एकबार फिर बीजेपी के पास लेकर आई है. यह देखना और भी दिलचस्प होगा कि 77 साल की उम्र में वाघेला का राजनीतिक करियर किस करवट बैठेगा!