नई दिल्लीः महाराष्ट्र में विधानसभा 2019 के चुनाव नतीजे 24 अक्टूबर को आ गए थे लेकिन भाजपा और शिवसेना के बीच सीएम पद के लिए चल रही खीचतान के कारण अभी तक राज्य में सरकार का गठन नहीं हो सका. शिवसेना ने अपने तेवर कड़े कर रखे हैं और वह भाजपा के साथ 50-50 फार्मूले से कम पर झुकने को तैयार नहीं है. इस बीच शिवसेना ने कई बार इस बात के भी संकेत दिए कि अगर भाजपा उसकी शर्तों को नहीं मानती तो वह दूसरे दलों के साथ मिलकर सरकार का गठन कर सकती है. सरकार बनाने के लिए उद्देश्य से शिवसेना के कई नेता एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार से भी मिल चुके हैं.

पहले तो शरद पवार इस बात पर अड़े हुए थे कि उनकों महाराष्ट्र की जनता ने विपक्ष में बैठने के लिए चुना है लेकिन अब सूत्रों से ऐसी खबरें आ रही हैं कि शरद पवार शिवसेना को समर्थन देने के लिए तैयार हो गए हैं और वह कुछ शर्तों के साथ सोमवार तक अपना समर्थन शिवसेना को देंगे. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सोनिया गांधी से भी उन्होंने इस पूरे मुद्दे में बात की है.

मिली जानकारी के अनुसार सोनिया गांधी शिवसेना और शरद पवार के गठबंधन को बाहर से अपना समर्थन देंगी. उम्मीद जताई जा रही है कि सोमवार तक दोनों ही पार्टी अपने गठबंधन को अंतिम रूप दे देंगी. आपको बता दें कि कांग्रेस ने हार्स ट्रेडिंग के डर से अपने विधायकों को महाराष्ट्र से जयपुर में शिफ्ट कर दिया है. फिलहाल जब तक राज्य में कोई सरकार का गठन नहीं हो जाता तब तक महाराष्ट्र के सियासी हलचल को समझ पाना बहुत ही मुश्किल हो रहा है. हाल ही में अभी शरद पवार ने कहा था कि भाजपा और शिवसेना को बहुमत मिला है और उन दोनों को ही मिलकर सरकार का गठन करना चाहिए.

अब फिर से एक बार शिवसेना और एनसीपी के गठबंधन की खबरें आ रही हैं. माना जा रहा है कि एनसीपी मंगलवार को अपने नवनिर्वाचित विधायकों की भी राय लेगी. उधर, महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता भेजा है. राज्यपाल ने 11 नवंबर तक बीजेपी को सरकार बनाने को लेकर राजभवन को सूचित करने का वक्त दिया है. राज्यपाल द्वारा दिए गए भाजपा को ऑफर से एनसीपी के नेता ने विरोध जताया है. उनका कहना है राज्यपाल को पहले इस बात की जानकारी लेनी चाहिए थे कि भाजपा के पास बहुमत है या नहीं.