नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी को नक्सलियों द्वारा कथित रूप से मारने की साजिश का भंडाफोड़ होने के बाद इसे लेकर सियासत जोरों पर है. विरोधी पार्टियां खासकर कांग्रेस इसे सरकार का शिगूफा करार दे रही है और इसे चुनाव से पहले फायदे उठाने की रणनीति बता रही है. इसी कड़ी में अब कद्दावर नेता एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार का नाम भी जुड़ गया है.

पुलिस-सरकार पर उठाए सवाल

भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ्तार नक्सलियों के खुलासे पर अब शरद पवार ने पुलिस और सरकार पर सवाल उठाए हैं. पुणे में एक कार्यक्रम में पवार ने कहा कि जब समान सोच वाले लोग एल्गार परिषद का आयोजन करते हैं तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है. सभी को पताहै कि भीमा कोरेगांव हिंसा में किसका हाथ था लेकिन इस मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया जिनका इससे कोई संबंध नहीं था. ये सत्ता का दुरुपयोग है.

उन्होंने कहा, वे (पुलिस) कहते हैं एक धमकी भरा पत्र मिला है. मैंने एक रिटायर्ड पुलिस ऑफिसर से बात की है, जिन्होंने सीआईडी में काम किया है. उन्होंने कहा कि इस पत्र में कोई दम नहीं है. इसका इस्तेमाल लोगों की सहानुभूति बटोरने के लिए किया जा रहा है.

5 को किया था गिरफ्तार

पुणे पुलिस ने एक जनवरी को भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में माओवादियों से कथित तौर पर जुड़ाव के लिए मुंबई, नागपुर और दिल्ली से नामी दलित कार्यकर्ता सुधीर धावले सहित पांच लोगों को 6 जून को गिरफ्तार किया था. एक साथ कई छापे के दौरान धावले को मुंबई में उनके घर से गिरफ्तार किया गया, वकील सुरेंद्र गाडलिंग, एक्टिविस्ट महेश राउत और शोमा सेन को नागपुर से और रोना विल्सन को दिल्ली में मुनिरका स्थित उनके फ्लैट से गिरफ्तार किया गया. पुलिस का कहना है कि इन्हीं में से एक के लैपटॉप में पीएम मोदी को मारने की साजिश का पत्र बरामद हुआ था.

धावले एल्गार परिषद के आयोजकों में थे. शनिवारवाडा में 31 दिसंबर को भीमा कोरेगांव लड़ाई के 200 साल पूरे होने के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. विश्रामबाग थाने में दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक कबीर कला मंच के कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर भड़काऊ भाषण दिए थे जिसके कारण जिले के कोरेगांव भीमा में हिंसा हुई. सुधीर धावले दलित कार्यकर्ता और मराठी पत्रिका विद्रोही के संपादक हैं जबकि नागपुर के वकील सुरेंद्र गाडलिंग भी दलितों और आदिवासियों के लिए काम करते हैं.

शोमा सेन नागपुर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं और उनके पति तुषार क्रांति भट्टाचार्य को नक्सलियों से कथित जुड़ाव के लिए 2010 में नागपुर स्टेशन से गिरफ्तार किया गया था. महेश राउत का भी माओवादियों से जुड़ाव होने की बात कही जा रही है. केरल के निवासी रोना विल्सन (47) दिल्ली में रहते हैं और कमेटी फोर रिलीज ऑफ पोलिटिकल प्रिजनर्स से जुड़े हुए हैं.

गौरतलब है कि एक जनवरी को भीमा कोरेगांव लड़ाई के 200 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में हिंसा भड़क उठी थी. भीमा कोरेगांव की लड़ाई में ब्रिटिश सेना ने एक जनवरी 1818 को पेशवा की सेना को हरा दिया था. हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और दस पुलिसकर्मी समेत कई अन्य घायल हुए थे.