नई दिल्ली: दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष शीला दीक्षित का शनिवार को निधन हो गया. वह 81 साल की थीं. शीला 1998 से 2013 के बीच 15 वर्षो तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं. वे देश की पहली ऐसी महिला मुख्यमंत्री थीं जिन्होंने लगातार तीन बार मुख्यमंत्री पद संभाला. इनको 17 दिसंबर, 2008 में लगातार तीसरी बार दिल्ली विधान सभा के लिये चुना गया था. 2013 में हुए विधान सभा चुनाव में कांग्रेस को मिली हार के बाद उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा. वे दिल्ली की दूसरी महिला मुख्य मंत्री थीं. 2017 के उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में कांगेस पार्टी की मुख्यमंत्री पद लिये उम्मीदवार घोषित की गई थीं.

शीला दीक्षित का राजजनीति में प्रशासन व संसदीय कार्यों का अच्छा अनुभव था. इन्होंने केन्द्रीय सरकार में 1986 से 1989 तक मंत्री पद भी ग्रहण किया था. इससे पहले वे संसदीय कार्यों की राज्य मंत्री रहीं. बाद में, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री रहीं. 1984- 89 में इन्होंने उत्तर प्रदेश की कन्नौज लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था. संसद सदस्य के कार्यकाल में, इन्होंने लोक सभा की एस्टीमेट्स समिति के साथ कार्य किया. इन्होंने भारतीय स्वतंत्रता की चालीसवीं वर्षगांठ की कार्यान्वयन समिति की अध्यक्षता भी की थी. दिल्ली प्रदेश कांग्रेस समिति की अध्यक्ष के पद पर, 1998 में कांग्रेस को दिल्ली में, अभूतपूर्व विजय दिलायी. 2008 में हुए विधान सभा चुनावों में शीला दीक्षित के नेतृत्व में कांग्रेस ने 70 में से 43 सीटें जीतीं.

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यहां हुआ शीला दीक्षित का जन्म
शीला दीक्षित का जन्म 31 मार्च, 1938 को हुआ था. इन्होंने अपनी शिक्षा दिल्ली के कान्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी स्कूल से ली. बाद में स्नातक और कला स्नातकोत्तर की शिक्षा मिरांडा हाउस कालेज से ली. इनका विवाह प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और पूर्व राज्यपाल व केन्द्रीय मंत्रिमंडल में मंत्री रहे, उमाशंकर दीक्षित के परिवार में हुआ. इनके पति स्व. विनोद दीक्षित भारतीय प्रशासनिक सेवा के सदस्य रहे थे. इनके दो संतानें हैं, एक पुत्र व एक पुत्री.

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शीला दीक्षित का यह रहा अहम योगदान
शीला दीक्षित ने विवेकानंद स्लम कालोनी, दिल्ली में महिला उत्थन के लिये अथक प्रयास किये. इनका महिलाओं को समाज में बराबरी का स्तर दिलाने के अभियानों में अच्छा नेतृत्व रहा था. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ की महिला स्तर समिति में भारत का प्रतिनिधित्व भी पांच वर्षों (1984 – 89) तक किया. इन्होंने उत्तर प्रदेश में अपने 82 साथियों के साथ अगस्त 1990 में 23 दिनों की जेल यात्रा की थी, जब वे महिलाओं पर समाज के अत्याचारों के विरोध में उठ खड़ी हुईं थी, तब उन्होंने प्रदर्शन भी किये थे. इससे भड़के हुए लाखों राज्य के नागरिक इस अभियान से जुड़े, व जेलें भरीं. 1970 में, वे यंग विमन्स असोसियेशन की अध्यक्षा भी रहीं, जिसके दौरान, इन्होंने दिल्ली में दो बड़े महिला छात्रावास खुलवाये. यह इंदिरा गाँधी स्मारक ट्रस्ट की सचिव भी रहीं.