नई दिल्ली। रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद केस में नया मोड़ आ गया है. उत्तर प्रदेश के शिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया है. इस हलफनामे में शिया वक्फ ने अयोध्या में विवादित जगह पर राम मंदिर का निर्माण करने की मांग की है. इसके अलावा इसमें कहा गया है कि मस्जिद का निर्माण अयोध्या में विवादित स्थल से उचित दूरी पर मुस्लिम बहुल इलाके में हो लेकिन शिया वक्फ बोर्ड के इस राय से सुन्नी वक्फ बोर्ड सहमत नहीं है.Also Read - सुप्रीम कोर्ट ने अपने वकीलों को हाईकोर्ट के जज बनाने की जानकारी देने से किया इनकार, बताई ये वजह

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बाबरी एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी ने कहा कि यह सिर्फ एक अपील है, शिया वक्फ बोर्ड के इस हलफनामे का कानून में कोई महत्व नहीं है. उधर, हलफनामे में बोर्ड अध्यक्ष वसीम रिजवी ने तर्क देते हुए कहा है कि दोनों धार्मिक स्थल के पास होने से दोनों समुदाय में संघर्ष की आशंका बनी रहेगी. बोर्ड ने यह भी कहा कि साल 1946 तक बाबरी मस्जिद उनके पास थी. अंग्रेजों ने गलत कानून प्रक्रिया से इसे सुन्नी वक्फ बोर्ड को दे दिया था. इस मामले में बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि शिया वक्फ बोर्ड ने भगवान की मर्जी से हस्तक्षेप किया है. Also Read - सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश की BSP MLA के पति की जमानत की रद्द, जताई सख्‍त नाराजगी

गौरतलब है कि विवादित अयोध्या राम जन्मभूमि मामले पर सुप्रीम कोर्ट में 11 अगस्त से 3 जजों की बेंच हर रोज सुनवाई करेगा. कोर्ट में दोपहर दो बजे से इस मामले पर सुनवाई शुरू होगी. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट सभी पक्षों की दलीलें सुनेगा. इनमें राम जन्मभूमि न्यास, निर्मोही अखाड़ा और तीसरा बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी हैं.

राम मंदिर पर कोर्ट का फैसला
राम मंदिर का विवाद जब कोर्ट पहुंचा तब इस मामले पर 13 मार्च, 2002 को सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने को कहा और शिलापूजन की इजाजत देने से इनकार कर दिया. वहीं इस विवाद पर साल 2009 को लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट संसद में पेश की गई लेकिन इस विवाद में 30 सितंबर 2010 को एक नया मोड़ आया जब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटा जिसमें एक हिस्सा राम मंदिर, दूसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े को देने का प्रस्ताव रखा.लेकिन 9 मई 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी.

ऐतिहासिक है विवाद
ऐसी मान्यता है कि अयोध्या में राम मंदिर की जगह पर 1528 में मस्जिद का निर्माण हुआ था. साल 1850 में पहली बार मंदिर को लेकर सांप्रदायिक दंगा फैला और उसके बाद ब्रिटिश सरकार ने बढ़ते विवाद के बाद 1859 में विवादित स्थल पर बाड़ लगा दी. इस दौरान मुस्लिम अंदर और हिंदू बाहरी हिस्से में पूजा-पाठ किया करते थे. लेकिन मंदिर की मांग को लेकर 1946 में हिंदू महासभा ने इस पर आंदोलन शुरू किया और 22 दिसंबर 1949 में वहां राम की मूर्ति स्थापित हुई। इस विवाद में भारतीय जनता पार्टी की इंट्री 1980 में हुई और फिर बीजेपी ने राम मंदिर आंदोलन का मोर्चा संभाल लिया. 1990 में एल के आडवाणी ने राम मंदिर के लिए रथयात्रा शुरू की है और 6 दिसंबर 1992 को कारसेवकों ने विवादास्पद ढांचे को गिरा दिया.