नई दिल्ली: राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा रविवार को तीनों विवादास्पद कृषि विधेयकों को मंजूरी दिए जाने के बाद एनडीए की पूर्व सहयोगी पार्टी शिरोमणि अकाली दल ने इसे भारत के लिए काला दिन बताया है. शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष और सांसद सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी की राष्ट्रपति इस बिल को वापस भेज देंगे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. Also Read - अमेरिकी चुनाव के बीच भारत आ रहे हैं डोनाल्ड ट्रंप के दो 'दूत', चीन को रोकने पर होगी चर्चा

उन्होंने कहा, “यह वास्तव में भारत के लिए एक काला दिन है कि राष्ट्रपति ने राष्ट्र के विवेक के रूप में कार्य करने से इनकार कर दिया. हमें बहुत उम्मीद थी कि वह इन बिलों को संसद में पुनर्विचार के लिए लौटा देंगे जैसा कि शिरोमणि अकाली दल और कुछ अन्य विपक्षी दलों द्वारा मांग की गई थी. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.” Also Read - चीन ने कई जगहों पर नेपाल की जमीन पर अवैध कब्जा किया, भारतीय खुफिया एजेंसियां सतर्क

बता दें कि राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने रविवार को तीन कृषि विधेयकों को मंजूरी दी, जिनके चलते इस समय एक राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ है और खासतौर से पंजाब और हरियाणा के किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. गजट अधिसूचना के अनुसार राष्ट्रपति ने तीन विधेयकों को मंजूरी दी. ये विधेयक हैं- 1) किसान उपज व्‍यापार एवं वाणिज्‍य (संवर्धन एवं सुविधा) विधेयक, 2020, 2) किसान (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) मूल्‍य आश्‍वासन अनुबंध एवं कृषि सेवाएं विधेयक, 2020 और 3) आवश्‍यक वस्‍तु (संशोधन) विधेयक, 2020. Also Read - आज के समय में भारत के लिए क्यों जरूरी है 'क्वाड'? विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताए इसके मायने

किसान उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक, 2020 का उद्देश्य विभिन्न राज्य विधानसभाओं द्वारा गठित कृषि उपज विपणन समितियों (एपीएमसी) द्वारा विनियमित मंडियों के बाहर कृषि उपज की बिक्री की अनुमति देना है.

किसानों (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) का मूल्‍य आश्‍वासन अनुबंध एवं कृषि सेवाएं विधेयक का उद्देश्य अनुबंध खेती की इजाजत देना है.

आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक अनाज, दालों, आलू, प्याज और खाद्य तिलहन जैसे खाद्य पदार्थों के उत्पादन, आपूर्ति, वितरण को विनियमित करता है.

इन विधेयकों को संसद में पारित किए जाने के तरीके को लेकर विपक्ष की आलोचना के बीच राष्ट्रपति ने उन्हें मंजूरी दी है. वहीं इससे पहले किसान बिलों का विरोध करते हुए मोदी सरकार से हरसिमरत कौर बादल के केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफे के बाद शिरोमणि अकाली दल ने भाजपा को अब एक और झटका दिया था. पार्टी ने किसान बिलों के खिलाफ लड़ाई तेज करते हुए ्नराजग (एनडीए) और भाजपा से 22 साल पुराना गठबंधन तोड़ दिया है.