नई दिल्ली: एनडीए से टीडीपी के अलग होने के बाद अब शिवसेना ने भी अलग होने की धमकी दी है. पिछले काफी समय से बीजेपी और शिवसेना के रिश्ते ठीक नहीं चल रहे. शिवसेना और बीजेपी पहले ही 2019 का चुनाव अलग होकर लड़ने का ऐलान कर चुके हैं. एनडीए से टीडीपी के अलग होने पर शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने कहा, ”शिवसेना को इसका पहले ही अंदाजा था, दूसरी पार्टियां भी एनडीए से अलग हो सकती हैं, एनडीए में शामिल दलों के बीजेपी से अच्छे संबंध नहीं हैं, धीरे-धीरे बाकी पार्टियों की शिकायत भी सामने आएंगी और बाकी पार्टियां भी एनडीए से अलग होंगी” शिवसेना के इस बयान से समझा जा रहा है कि एनडीए में फूट पड़ सकती है और 2019 में होने वाले आम चुनाव से पहले समीकरण बदल सकते हैं. Also Read - ग्वालियर में लगे ज्योतिरादित्य सिंधिया के गुमशुदगी के पोस्टर्स, लिखा- 'गुमशुदा जन सेवक की तलाश...'

शिवसेना प्रवक्ता मनीषा कायंदे ने कहा है कि, ”टीडीपी से पहले उद्धव ठाकरे अपना स्टैंड साफ कर चुके हैं, टीडीपी के दो मंत्री इस्तीफा दे रहे हैं, बीजेपी को इस बारे में सोचना चाहिए. एनडीए के पुराने नेताओं ने गठबंधन को संभाल कर रखा था लेकिन अब अति आत्मविश्वास दिखाई दे रहा है, 2019 का चुनाव बीजेपी के लिए चुनौती भरा साबित होगा”

आंध्र प्रदेश कैबिनेट में शामिल बीजेपी के दो विधायकों ने सीएम ऑफिस में अपना इस्तीफा सौंप दिया है. चंद्राबाबू नायडू की सरकार में शामिल मानिक्याला राव और कामिनेनी श्रीनिवास राव ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. आंध्र प्रदेश में बीजेपी के एमएलसी पीवीएन माधव ने कहा कि, हम जनता के बीच जाएंगे और जनता को बताएंगे कि बीजेपी की केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश के लिए कितना कुछ किया है. आजादी के बाद से अबतक किसी भी राज्य को इतनी सुविधाएं नहीं दी गई जितनी आंध्र प्रदेश को मिली है.

टीडीपी सांसद राम मोहन नायडू ने कहा कि, ”बुधवार को दिए गए अरुण जेटली के बयान के बाद हमने एनडीए से अलग होने का फैसला किया है, हम अपना हक मांग रहे हैं और इसे नकारा नहीं जा सकता, अभी तक हम एनडीए में हैं और इस गठबंधन पर चर्चा जारी है, हम बीजेपी के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई नहीं लड़ना चाहते बल्कि हम आंध्र के हक के लिए लड़ना चाहते हैं”

इससे पहले नायडू ने कहा था कि केंद्र में रहने का कोई फायदा नहीं हुआ. हम आंध्र के फायदे के लिए एनडीए में शामिल हुए थे. हमसे जो वादा किया गया था वो पूरा नहीं किया गया. सीएम नायडू ने कहा कि बजट के बाद से ही हम ये मुद्दा उठा रहे थे लेकिन केंद्र सरकार ने हमारी नहीं सुनी. केंद्र सुनने के मूड में नहीं है. मुझे नहीं पता कि मैंने क्या गलती की है. वे ऐसी बातें क्यों कर रहे हैं. नायडू ने कहा कि सदभावना के तहत और सीनियर राजनीतिज्ञ होने के नाते मैं इस फैसले से पीएम को अवगत कराने गया था, लेकिन वह उपलब्ध नहीं थे.

बीजेपी को निशाने पर लेते हुए नायडू ने कहा कि हम बीजेपी के साथ इसलिए आए क्योंकि हम चाहते थे कि आंध्र प्रदेश के साथ इंसाफ हो. मैं 29 बार दिल्ली गया और हर बार कई लोगों से मुलाकात की. इसके बावजूद हमारे साथ न्याय नहीं किया गया. उन्होंने हमेशा आंध्र के साथ नाइंसाफी की.