नई दिल्ली/ श्रीनगर: देश की रक्षा करते हुए मंगलवार को जम्मू-कश्मीर में एलओसी के गुरेज सेक्टर में आतंकियों की घुसपैठ रोकते हुए सेना के एक मेजर समेत चार जवान होने के बाद केंद्र में बीजेपी के नेतृत्व वाली नरेंद्र मोदी सरकार का बिना नाम लिए हुए सत्ता में भागीदार शिवसेना ने निशाना साधा है. वहीं, जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारुख अब्दुल्ला ने कहा है कि हमें इसका मुकाबला करना पड़ेगा. पाकिस्तान अगर शांति चाहता है तो घुसपैठ रोके.

बता दें कि मंगलवार को बांदीपोरा के गुरेज सेक्टर की नियंत्रण रेखा की तरफ से आतंकवादियों के एक समूह ने घुसपैठ करने की कोशिश की. इस पर इंडियन आर्मी ने जवाबी कार्रवाई की लेकिन आतंकियों से मुठभेड़ करते हुए एक मेजर और तीन जवान शहीद हो गए.

जम्मू-कश्मीर: आतंकियों से LOC पर मुठभेड़ में मेजर समेत 4 जवान शहीद, 2 घुसपैठिए ढेर 

जम्मू-कश्मीर में एलओसी में घुसैपैठ रोकते हुए 4 जवानों की शहादत को लेकर शिवसेना ने सरकार का बिना नाम लिए सवाल उठाए हैं. शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने कहा, हमारे जवान जितने शहीद पिछले 4 साल में हुए हैं, उतने पिछले 50 साल में नहीं हुए हैं”


गुरेज सेक्टर में आर्मी के एक अफसर और तीन जवानों के शहीद होने पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला ने कहा, ” अपने शहीद हो गए है तो हमको देखना चाहिए कि इसका मुकाबला हमें करना पड़ेगा. अगर पाकिस्तान भारत से अच्छे रिश्ते बनाए रखना चाहता है, ये जरूरी है कि घुसपैठ रुक जाए.

एलओसी और आईबी पर संघर्ष विराम उल्लंघन की घटनाएं बढ़ी
– सरकार ने संसद में बताया कि नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर संघर्ष विराम उल्लंघन की घटनाओं में वृद्धि हुई है.
– जम्मू कश्मीर में इस साल जुलाई तक नियंत्रण रेखा पर 954 बार संघर्ष विराम उल्लंघन किया गया है
– रक्षा राज्य मंत्री डॉ सुभाष भामरे ने राज्यसभा को बताया कि साल 2017 में एलओसी पर 860 बार संघर्ष विराम उल्लंघन किया गया था
– जम्मू कश्मीर में चालू वर्ष में जुलाई माह तक वहां 945 बार संघर्ष विराम उल्लंघन किया गया
– 2017 में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 111 बार संघर्षविराम उल्लंघन किया गया
– जबकि इस साल जून तक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 490 बार संघर्षविराम उल्लंघन किया गया
– ये बात राज्यमंत्री भामरे ने एक प्रश्न के लिखित जवाब में बताई
– सेना और सुरक्षा बलों ने घुसपैठ रोकने के लिए एक घुसपैठ रोकने के लिए पुख्ता रणनीति अपनाई है
– इस रणनीति में प्रौद्योगिकी और मानव संसाधन का उपयुक्त समावेश है