नई दिल्ली. शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी सरकार पर सवाल खड़ा किया है. इस बार वह पीएम मोदी के इंटरव्यू को लेकर संपादकीय लिखा है और पूछा है कि क्या इस इंटरव्यू में जनता के सवालों का जवाब मिल गया. इसमें कहा गया है कि पीएम ने एक चैनल को इंटरव्यू दिया, जिसे सबने चलाया. इसके बाद इस तरह का प्रचार शुरू हुआ कि पीएम ने जनता से जुड़े सवालों का जवाब दिया है. यह गलत है. राम मंदिर, नोटबंदी, इस साल होने वाले आम चुनाव पर व बोले. लेकिन क्या जनता के सवालों का जवाब मिला?

बता दें कि एक जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न्यूज एजेंसी एएनआई को एक इंटरव्यू दिया था. यह इंटरव्यू 95 मिनट का था, जिसे सभी न्यूज चैनल्स ने चलाया. शिवसेना ने लिखा, ऐसी उम्मीद थी कि मोदी इंटरव्यू में राम को लेकर कोई महत्वपूर्ण घोषणा करेंगे. अयोध्या में प्रभु श्रीराम का वनवास खत्म होगा. लेकिन मोदी ने बिल्कुल अलग नीति अपनाई. मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद सहित शिवसेना की राम मंदिर के लिए अध्यादेश लाओ की मांग ठुकरा दी. पिछले 4-5 वर्षों में पहली बार वे सच बोले हैं. राम मंदिर उनके लिए प्राथमिकता का विषय नहीं है. सवाल ये है कि मोदी के बहुमतवाले राज में राम मंदिर नहीं बनेगा तो कब बनेगा?

माफी मांगनी पड़ेगी
लेख में आगे लिखा है, मोदी ने गुजरात में सरदार पटेल की विशाल और वैश्विक ऊंचाईवाली प्रतिमा खड़ी की है, लेकिन मंदिर के मामले पर सरदार वाली हिम्मत नहीं दिखाई. राम मंदिर को बाद में देखेंगे, पहले चुनाव लड़ेंगे. ऐसी उनकी रणनीति दिखाई देती है. इस पर भाजपा के राम भक्त तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद का क्या कहना है? 2019 के पहले राम मंदिर नहीं बनने वाला होगा तो यह देश के साथ विश्वासघात होगा और उसके लिए भाजपा को, संघ परिवार को देश से माफी मांगनी पड़ेगी.

नरसंहार क्यों हुए
1991-92 में राम मंदिर का आंदोलन शुरू हुआ. उसमें सैकड़ों कारसेवक मारे गए. फिर यह हिंदू नरसंहार किसने किसके लिए कराया? राम मंदिर के आंदोलन में सैकड़ों हिंदू कारसेवक तो मारे गए, साथ ही मुंबई सहित देश में अन्य स्थानों पर दंगे हुए और उसमें भी दोनों तरफ से बहुत बड़ा नरसंहार हुआ. ऊपर से इसका बदला लेने के लिए मुंबई में सिलसिलेवार बम विस्फोट कराकर सैकड़ों लोगों की जानें ली गई. न्यायालयीन प्रक्रिया से राम मंदिर का निर्णय लेना था तो फिर यह रक्तपात और नरसंहार किसलिए कराया गया? इसकी जिम्मेदारी भाजपा या संघ परिवार अब लेनेवाला है क्या? सिख हत्याकांड के लिए जिस तरह कांग्रेस को माफी मांगनी पड़ी, उसी तरह हिंदू नरसंहार के लिए माफी मांगो, ऐसा कोई कहे तो उसकी भी भावनाओं को समझना होगा.