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जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के खिलाफ शनिवार को शिवसेना ने मोर्चा खोलते करारा हमला बोलते हुए अपमानजनक टिप्पणी कर डाली। बता दे कि शिवसेना के मुखपत्र “सामना” में “गीदड़ की औलाद” शीषर्क से छपे संपादकीय में लिखा है कि जम्मू-कश्मीर में पीडीपी और बीजेपी की गठजोड़ की राजनीति बीजेपी के लिए अड़चन ला सकती है। साथ ही सामना में मुफ़्ती को पाकिस्तान परस्त भी बताया गया है। संपादकीय में लिखा गया है कि पीडीपी और भाजपा का गठबंधन देश को संकट में डालने वाला सिद्ध होगा।

ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद जिस तरह से मुफ्ती ने पाकिस्तान, आतंकियों और हुर्रियत को धन्यवाद दिया था. उसकी शिवसेना ने धज्जियां उड़ाते हुए इस तरह का हमला बोला है। सामना में लिखा गया है, ‘सईद के शपथ ग्रहण समारोह में पीएम मौजूद थे। शपथ के बाद सईद ने उसी जगह जहर उगला। सईद का कहना है कि कश्मीर में चुनाव शांतिपूर्वक पाकिस्तान और पाकिस्तानपरस्त आतंकी संगठनों की मेहरबानी से संपन्न हो सके। यह बयान देकर सईद ने साबित कर दिया कि वह खुद गीदड़ की औलाद हैं।’

सामना पीडीपी विधायकों द्वारा अफजल गुरु के अवशेषों को श्रीनगर को सौंपने की मांग का भी जिक्र किया गया है। साथ कहा गया हैं कि इसमें मुफ्ती ने भी विधायको का साथ दिया। जिसके चलते अफजल पर दिए बयान से पूरे देश में बवाल मचा और हमारे मित्र भाजपा को मुंह दबाकर मुक्कों की मार सहनी पड़ी। भाजपा महासचिव राम माधव कश्मीर में भाजपा-पीडीपी गठबंधन के लिए वार्ता कर रहे थे, लेकिन मुफ्ती के विषैले बयानों का सामना वो खुद भी नहीं कर सके।’

सामना के इस लेख में मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी के अपहरण की वर्षों पुरानी घटना पर भी सनसनीखेज आरोप लगाया गया है। लेख में लिखा गया, ‘वीपी सिंह की सरकार में सईद गृह मंत्री थे। उत्तर प्रदेश की मुजफ्फरनगर सीट से जीतकर संसद पहुंचे थे। उनके गृहमंत्री रहते आतंकियों ने उनकी बेटी रुबिया सईद का अपहरण कर लिया। रुबिया को छुड़ाने के लिए उन्हें दो आतंकियों को रिहा करना पड़ा। बाद में पता चला कि रुबिया के अपहरण का नाटक खुद सईद की सहमति से रचा गया था।’

सईद पर हमलावर हुए सामना में यहां तक लिखा गया है कि सईद की सहानुभूति हमेशा आतंकियों के साथ रही है। शिवसेना के मुखपत्र ने नरेंद्र मोदी सरकार से यह मांग भी की कि वह सईद के उस बयान की संसद में निंदा करे, जिसमें सईद ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों के शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो जाने का श्रेय अलगाववादियों और पाकिस्तान को दिया था।