मुंबई: महाराष्ट्र में राकांपा, कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार चला रही शिवसेना ने विवादास्पद नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) का समर्थन करने का फैसला किया है. जबकि कांग्रेस ने पहले ही इस विधेयक को ‘असंवैधानिक’ करार दिया है. शिवसेना सांसद संजय राउत ने सोमवार को ट्विटर पर इसकी घोषणा की. राउत ने कहा- “गैर-कानूनी रूप से रह रहे घुसपैठियों को बाहर निकाला जाना चाहिए.” हालांकि लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पेश किए जाने को लेकर शिवसेना ने सवाल भी खड़ा किया. शिवसेना ने कहा कि हिंदू अवैध शरणार्थियों की ‘चुनिंदा स्वीकृति’ देश में धार्मिक युद्ध छेड़ने का काम नहीं करेगी. साथ ही शिवसेना ने केंद्र पर विधेयक को लेकर हिंदुओं तथा मुस्लिमों का ‘अदृश्य विभाजन’ करने का आरोप लगाया. उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी ने यह भी कहा कि विधेयक की आड़ में ‘वोट बैंक की राजनीति’ करना देश के हित में नहीं है.

राउत ने कहा, “अप्रवासी हिंदुओं को नागरिकता दी जानी चाहिए, लेकिन अमित शाह, वोट बैंक बनाने के आरोपों को विराम दें और शरणार्थियों को वोट देने का अधिकार नहीं दें. इस पर आप क्या कहते हैं? और हां (कश्मीरी) पंडितों के बारे में आपका क्या कहना है? क्या अनुच्छेद 370 रद्द किए जाने के बाद वे वापस कश्मीर जाकर रह पाएंगे?”

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पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में एक संपादकीय में शिवसेना ने विधेयक के समय पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘भारत में अभी दिक्कतों की कमी नहीं है लेकिन फिर भी हम नागरिकता संशोधन विधेयक जैसी नई परेशानियों को बुलावा दे रहे हैं. ऐसा लगता है कि केंद्र ने विधेयक को लेकर हिंदुओं और मुस्लिमों का अदृश्य विभाजन किया है.’ साथ ही शिवसेना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कुछ पड़ोसी देशों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की अपील की.

शिवसेना ने सवाल किया, ‘यह सच है कि हिंदुओं के लिए हिंदुस्तान के अलावा कोई दूसरा देश नहीं है, लेकिन अवैध शरणार्थियों में से केवल हिंदुओं को स्वीकार करके देश में एक गृह युद्ध नहीं छिड़ जाएगा?’ उसने कहा, ‘अगर कोई नागरिकता (संशोधन) विधेयक की आड़ में वोट बैंक की राजनीति करने की कोशिश करता है तो यह देश के हित में नहीं है.’ संपादकीय में कहा गया है, ‘पाकिस्तान की तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अन्य पड़ोसी देशों को भी कड़ा सबक सिखाना चाहिए जो हिंदू, सिख, ईसाई, पारसी और जैन समुदायों पर अत्याचार करते हैं.’

(इनपुट-एजेंसी)