नई दिल्लीः क्या मध्य प्रदेश में भाजपा की हालत खस्ता है? कुछ ऐसे ही संकेत मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जन आशीर्वाद यात्रा के अचानक रोके जाने से दिखते हैं. राज्य में चुनावी बिगुल फूंकते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 14 जुलाई को उज्जैन से जन आशीर्वाद यात्रा की शुरुआत की थी. इस यात्रा को सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरना था लेकिन गुरुवार को जबलपुर में इसे अचानक बंद कर दिया गया. इस दौरान यह यात्रा केवल 187 क्षेत्रों से ही गुजर पाई. इस यात्रा में आधुनिक सुविधाओं से लैस एक गाड़ी का इस्तेमाल किया गया था. इस यात्रा को बंद करने की घोषण केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने की. प्रधान मध्य प्रदेश भाजपा के प्रभारी हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक शिवराज चौहान ने 2008 और 2013 के चुनाव से पहले ऐसी ही यात्रा निकाली थी. ये यात्राएं 25 सितंबर को खत्म हुई थीं. 25 सितंबर भाजपा के विचारक दीन दयाल उपाध्याय का जन्म दिन है. यात्रा खत्म को लेकर अपनी सफाई में भाजपा ने कहा है कि चुनाव पास आ गए हैं. ऐसे में मुख्यमंत्री को टिकट वितरण में समय देने की जरूरत है. वरिष्ठ नेता प्रभात झा ने कहा कि बाकी बचे क्षेत्रों को दूसरे तरीके से चुनाव से पहले कवर कर लिया जाएगा. इस बीच यात्रा रोके जाने को लेकर कांग्रेस ने कहा कि जनता से उत्साहजनक प्रतिक्रिया नहीं मिल रही थी इस कारण इसे बीच में ही रोकना पड़ा.

मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि शुरुआत में भाजपा सरकारी कर्मचारियों, पटवारियों और आशा कार्यकर्ताओं को यात्रा में शामिल होने के लिए कहती थी, लेकिन जब चुनाव आचार संहिता लागू हो गया तो ये कर्मचारी चुनावी ड्यूटी के कारण यात्रा में शिरकत नहीं कर पा रहे थे. इतना ही नहीं नाराज किसान भी अपनी मांगों के लेकर सीएम का घेर रहे थे.