Shopian Encounter: जम्मू कश्मीर के शोपियां में पिछले वर्ष जुलाई में हुई फर्जी मुठभेड़ के मामले में पुलिस के आरोप पत्र में कहा गया है कि सेना के कैप्टन और दो अन्य आरोपियों ने मारे गए तीन युवकों के पास रखे गए हथियारों के स्रोत के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है और इन लोगों ने साक्ष्य नष्ट करने की कोशिश की थी.Also Read - क्वाड से बौखलाए चीन का War Plan लीक, चीन को चारों ओर से घेरेंगी Quad Countries | Watch Video  

जम्मू कश्मीर पुलिस के विशेष जांच दल (एसआईटी) ने यहां मुख्य मजिस्ट्रेट के समक्ष दाखिल अपने आरोप पत्र में कहा है कि कैप्टन भूपेन्द्र सिंह ने मुठभेड़ में मिले सामान के बारे में अपने वरिष्ठों और पुलिस को गलत सूचना दी थी. Also Read - जापान में जुटे चार देश तो हिल गया चीन, अमरीका ने ताइवान मसले पर चीन को दी खुली चुनौती | Watch Video  

यह मामला 18 जुलाई, 2020 को शोपियां के अम्शीपुरा में हुई मुठभेड़ से जुड़ा है जिसमें तीन युवक मारे गए थे और उन्हें आतंकवादी करार दिया गया था. बाद में सोशल मीडिया में खबरें आईं कि तीनों युवक निर्दोष थे जिसके बाद सेना ने ‘कोर्ट ऑफ इंक्वायरी ’ के आदेश दिए थे. Also Read - हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में चीन का बुलबुला फोड़ेंगे चार देश; भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया ने की जुगलबंदी | Watch Video  

आरोप पत्र में कहा गया कि शवों के पास रखे गये अवैध हथियारों के स्रोत के बारे में आरोपियों से कोई जानकारी नहीं मिली है. इसमें कहा गया है कि मुठभेड़ की रूपरेखा तैयार करते समय तीनों आरोपियों ने अपराध के साक्ष्यों को जानबूझ कर नष्ट किया और पुरस्कार के 20 लाख रुपए पाने के लिए उनके बीच बनी आपराधिक साजिश के तहत वे गलत सूचनाएं देते रहे.

सेना ने हालांकि इस बात से इनकार किया है कि उसके कैप्टन ने 20 लाख रुपये के लिए मुठभेड़ की साजिश रची थी. आरोप पत्र में कहा गया है, ‘‘आरोपी कैप्टन सिंह द्वारा सबूतों को नष्ट किया गया.’’

(इनपुट भाषा)