नई दिल्ली: जम्‍मू कश्‍मीर के शोपियां में गोलीबारी को लेकर मेजर आदित्‍य कुमार के पिता की याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इसमें राज्‍य सरकार ने कहा कि एफआईआर में मेजरर आदित्‍य का नाम नहीं है. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक मामले की जांच और कार्रवाई पर रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम सुनवाई की तारीख 24 अप्रैल तय की है. कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा कि सीआरपीसी के तहत राज्य सरकार केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति के बिना प्राथमिकी दर्ज नहीं कर सकती. सुप्रीम कोर्ट मामले में सबसे पहले यह देखेगा की प्राथमिकी तय कानून के तहत हुई है या नहीं?

इससे पहले शोपियां फायरिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मेजर आदित्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने पर रोक लगा दी थी. 12 फरवरी को मामले की सुनवाई करते हुए सेना पर एफआइआर के मामले में शीर्ष न्यायालय ने केंद्र और जम्मू कश्मीर सरकार को नोटिस भी जारी किया था. राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए कोर्ट ने दो सप्ताह के भीतर जवाब तलब करने के लिए कहा था. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने मेजर आदित्य के पिता की याचिका पर सुनवाई के दौरान साफ निर्देश दिए कि सेना के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी.

मेजर के पिता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था
जम्मू कश्मीर के शोपियां में गोलीबारी की घटना में पुलिस की ओर से सेना के मेजर आदित्य कुमार पर दर्ज प्राथमिकी को खारिज करने की मांग करते हुए उनके पिता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. लेफ्टिनेंट कर्नल करमवीर सिंह ने कहा था कि 10 गढ़वाल राइफल्स में मेजर उनके बेटे को प्राथमिकी में ‘गलत और मनमाने ढंग से’ नामजद किया गया है, क्योंकि यह घटना अफस्पा वाले एक क्षेत्र में सैन्य ड्यूटी पर जा रहे सैन्य काफिले से जुड़़ी है. इस सैन्य काफिले को घेर कर भीड़ ने उस पर पथराव किया जिससे कई सैन्य वाहन क्षतिग्रस्त हो गए थे.

बचाव के लिए चलाई गई गोलियां
सिंह की अर्जी में कहा गया है कि उनके बेटे का इरादा केवल सैन्य कर्मियों और संपत्ति को बचाना था. आतंकी गतिविधि पर उतरी हिंसक भीड़ से बचने के वास्ते ही गोलियां चलायी गयी थी. अर्जी के अनुसर भीड़ से चले जाने, और सेना के काम में बाधा नहीं डालने तथा सरकारी संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाने का अनुरोध किया गया लेकिन जब स्थिति नियंत्रण के बाहर चली गयी तब चेतावनी जारी की गयी. ऐसे में जब हिंसक भीड़ ने एक जूनियर कमीशन प्राप्त अधिकारी को पकड़ लिया और उसे पीट पीट कर मार डालने पर उतर आयी तो भीड़ को तितर-बितर करने के लिए चेतावनी में गोलियां चलायी गयीं.