आज बकरीद का त्योहार है, देश का मुस्लिम समुदाय तो बकरीद मनाएगा लेकिन पाकिस्तान की वजह से पिछले लगभग 2 महीनों से कर्फ्यू से परेशान कश्मीर के लोगों के लिए बकरीद का त्योहार फीका पड़ गया है। लेकिन बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा ने इस बार बकरीद के त्योहार पर बकरीद को ‘इको-फ्रेंडली’ तरीके से मनाने पर चर्चा आयोजित करने की वकालत करते हुए कहा कि देश के बुद्धिजीवियों को इस पर विचार करना चाहिए।Also Read - Bank Holidays in April 2021: 8 दिन देश में बैंकों की रहेगी छुट्टी, जल्दी निपटाएं अपने काम, यहां देखें लिस्ट

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इस सुझाव का विरोध कर रहे लोगों का तर्क है कि ये धर्म से जुड़ा मामला है। इसलिए इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए लेकिन सवाल ये कि जब किसी भी धर्म की कल्पना सृष्टि यानी कुदरत के बिना नहीं की जा सकती तो फिर कुदरत को बचाने के लिए धर्म के तौर तरीकों में बदलाव क्यों ना किया जाए। यह भी पढ़ें: इरफान खान ने बकरा ईद को लेकर दिया विवादित बयान, कहा कुर्बानी का मतलब बकरे काटना नहीं Also Read - सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होने की तैयारी में भारतीय, बढ़ सकती है कोविड -19 के फैलने की आशंका

बकरीद के मौके पर बकरे की बलि दी जाती है। कई और धर्मों के लोग भी अलग अलग मौकों पर जानवरों की बलि देते हैं। धर्म के नाम पर लाखों करोड़ों जानवरों की जान ले लना ना सिर्फ मानवता के खिलाफ है बल्कि इससे पर्यावरण को भी बहुत नुकसान पहुंचता है।

हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि जब तक कुदरत खुश नहीं रहेगा उसे नुकसान पहुंचता रहेगा, तब तक त्योहार मनाने का असली मकसद पूरा नहीं हो पाएगा। सभी धर्मों का मानना है कि मौका चाहे होली का हो, दीवाली का हो, गणपति विसर्जन का, क्रिसमस का या फिर ईद का, हमें सभी त्योहारों को ईको-फ्रेंडली तरीके से मनाने पर जोर देना चाहिए।

काफी समय से होली, दीपावली, गणपति विसर्जन और दूसरे त्योहारों को इको फ्रेंडली बनाने की मांग हो रही है और इसे लेकर कई स्तर पर कामयाबी भी मिली है। ऑरगेनिक रंगों का इस्तेमाल करके या सूखी होली खेल कर इको फ्रेंडली होली को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। ई-क्रैकर्स के ज़रिये वर्चुअल दीवाली मनाकर प्रदूषण कम करने की नसीहत दी जा रही है।

मुंबई में पिछले कई वर्षों से कई जगहों पर इको फ्रेंडली गणपति और दुर्गा का विसर्जन भी हो रहा है। सवाल ये है कि क्या इसी तरह से इको फ्रेंडली बकरीद मनाई जा सकती है?

बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘जिस तरीके से हम ज्यादा पर्यावरण हितैषी बनते जा रहे हैं, देश और दुनिया में जिस तरीके से इस सिलसिले में अभियान चल रहा है,यह चर्चा का विषय है और इस बारे में चर्चा होनी चाहिए। देश का बुद्धिजीवी वर्ग अगर इस विषय पर चर्चा करे तो अच्छा होगा।

श्रीकांत शर्मा एक सवाल का जवाब दे रहे थे कि क्या बकरीद या ईद उल अजहा को ‘इको-फ्रेंडली’ तरीके से मनाया जाना चाहिए जैसा कि दूसरे त्योहारों में होता है। बकरीद पर पूरी दुनिया में पवित्र परम्परा के तहत जानवरों की कुर्बानियां दी जाती हैं।

कई कार्यकर्ता जानवरों की कुर्बानी के खिलाफ हैं जिनमें कई का कहना है कि जानवरों की हत्या नहीं करना पर्यावरण के लिए अच्छा है। शर्मा ने स्पष्ट किया कि ‘इको-फ्रेंडली’ ईद मनाई जाए अथवा नहीं यह चर्चा का विषय है।

हम मानते हैं कि कोई भी त्योहार खुशियां मनाने के साथ-साथ अपने परिवार के लिए, अपने समाज के लिए, अपने देश के लिए और कुल मिलाकर इंसानियत के लिए कुछ बेहतर करने का मौका होता है। चाहे वो त्योहार हिंदुओं का हो, मुसलमानों का हो या फिर ईसाइयों का हो। हर त्योहार हमें मौका देता है कि सभी तरह के प्रदूषण को खत्म कर दिया जाए। चाहे वो प्रदूषण हमारी सोसायटी का हो या फिर हमारे पर्यावरण का। जब बकरीद के इको फ्रेंडली होने का मुद्दा उठाया जा रहा है, तब कई लोग ये भी कह रहे हैं कि ये इस्लाम पर हमला है और बगैर कुर्बानी के बकरीद का त्योहार नहीं मना सकते।

वहीं त्योहारों को इको-फ्रेंडली तरीके से मनाने का सुझाव रखने वालों का कहना है कि समय के मुताबिक अगर देश का संविधान बदला जा सकता है तो फिर पर्यावरण की बेहतरी के लिए परंपराएं क्यों नहीं बदली जा सकती हैं। जिस धरती पर हमनें धर्म की रचना की है उसे बचाना भी हमारा ही धर्म है और अगर इसके लिए परंपराओं में थोड़ा परिवर्तन भी करना पड़े तो ऐसा जरूर किया जाना चाहिए।