नई दिल्ली. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आज हिमालय की बर्फीली चोटियों पर स्थित सियाचिन पोस्ट पर तैनात सेना के जवानों से मिलने पहुंचे थे. जमीन से 20 हजार से भी अधिक ऊंचाई पर जीरो से भी कम, माइनस 52 डिग्री तक के तापमान में डटे रहने वाले जवानों की राष्ट्रपति ने हौसला अफजाई की. उन्होंने वहां सेना के जवानों को संबोधित करते हुए कहा, ‘आप लोग कठिन परिस्थितियों में भी देश की रक्षा करने के लिए डटे रहते हैं. मैं आप लोगों से मिलने के लिए उत्सुक था.’ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सेना के जवानों को राष्ट्रपति भवन घूमने के लिए आमंत्रण भी दिया. उन्होंने जवानों से कहा, ‘राष्ट्रपति भवन देश की एक अनमोल धरोहर है. इसकी भव्यता पर हर देशवासी को गर्व है. आप सबका जब भी दिल्ली आना हो, तो राष्ट्रपति भवन को देखने जरूर आएं. आप सबका राष्ट्रपति भवन में स्वागत है.’ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की सियाचिन यात्रा की तस्वीरें आप भी देखिए. Also Read - J&K Latest News: जम्‍मू-कश्‍मीर के पुंछ में पाकिस्‍तान की फायरिंग में JCO शहीद

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सियाचिन में तैनात जवानों से मुलाकात की. अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रपति का पदभार ग्रहण करने के बाद दिल्ली से बाहर अपनी सबसे पहली यात्रा पर मैं अपने सैनिकों से मिलने लद्दाख आया था और सभी तैनात बटालियनों और ‘स्काउट रेजीमेंट सेंटर’ के वीर जवानों से मिला था. उस समय ही मैंने एक संकल्प लिया था कि मैं सियाचिन में तैनात अपने सैनिकों से भी मिलने आऊंगा. आज आप सभी के बीच आकर मेरा वह संकल्‍प पूरा हो रहा है.

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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सियाचिन में तैनात जवानों से मुलाकात की. अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रपति का पदभार ग्रहण करने के बाद दिल्ली से बाहर अपनी सबसे पहली यात्रा पर मैं अपने सैनिकों से मिलने लद्दाख आया था और सभी तैनात बटालियनों और ‘स्काउट रेजीमेंट सेंटर’ के वीर जवानों से मिला था. उस समय ही मैंने एक संकल्प लिया था कि मैं सियाचिन में तैनात अपने सैनिकों से भी मिलने आऊंगा. आज आप सभी के बीच आकर मेरा वह संकल्‍प पूरा हो रहा है.

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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सेना के जवानों के साथ कई घंटे बिताए. उन्होंने कहा कि आप सभी जवानों और अधिकारियों से मिलने के लिए मैं बहुत उत्सुक था. सियाचिन दुनिया का सर्वाधिक ऊंचाई पर स्‍थित युद्ध-क्षेत्र है और यहां की कठोरतम जलवायु में सामान्‍य जीवन जीना ही कठिन है. ऐसी परिस्‍थिति में दुश्‍मन से युद्ध के लिए तत्‍पर रहना तो बहुत ही मुश्किल होता है. कठोरतम प्राकृतिक चुनौतियों के बीच देश की रक्षा में लगे हुए अपने ऐसे वीर जवानों से आमने-सामने मिलना ही मेरे लिए गर्व की बात है.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सेना के जवानों के साथ कई घंटे बिताए. उन्होंने कहा कि आप सभी जवानों और अधिकारियों से मिलने के लिए मैं बहुत उत्सुक था. सियाचिन दुनिया का सर्वाधिक ऊंचाई पर स्‍थित युद्ध-क्षेत्र है और यहां की कठोरतम जलवायु में सामान्‍य जीवन जीना ही कठिन है. ऐसी परिस्‍थिति में दुश्‍मन से युद्ध के लिए तत्‍पर रहना तो बहुत ही मुश्किल होता है. कठोरतम प्राकृतिक चुनौतियों के बीच देश की रक्षा में लगे हुए अपने ऐसे वीर जवानों से आमने-सामने मिलना ही मेरे लिए गर्व की बात है.

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तीनों सेनाओं के सुप्रीम कमांडर के रूप में सियाचिन पहुंचने वाले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद देश के दूसरे राष्ट्रपति हैं. इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम सियाचिन के पोस्ट पर सेना के जवानों से मिलने पहुंचे थे. राष्ट्रपति ने इस मौके पर दिए गए अपने संबोधन में कहा, ’76 किलोमीटर की लंबाई और चार-से-आठ किलोमीटर की चौड़ाई वाला यह सियाचिन ग्लेशियर हमारे देश के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है. राष्‍ट्र के गौरव का प्रतीक हमारा तिरंगा इस ऊंचाई पर पूरी शान के साथ सदैव लहराता रहे, इसके लिए आप सब बेहद कठिन चुनौतियों का सामना करते रहते हैं. अनेक सैनिकों ने यहां सर्वोच्‍च बलिदान भी दिया है. मैं ऐसे सभी बहादुर ‘सियाचिन वॉरियर्स’ को नमन करता हूं.

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सियाचिन यात्रा के दौरान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत भी थे. यात्रा के दौरान राष्ट्रपति ने सियाचिन स्मारक पर पुष्पांजलि भी अर्पित की. इसके बाद उन्होंने सेना के जवानों से मुलाकात की और कहा, ‘अप्रैल 1984 में ‘ऑपरेशन मेघदूत’ के तहत भारतीय सेना ने सियाचिन में प्रवेश किया था. तब से लेकर आज तक, आप जैसे वीर जवानों ने मातृभूमि के सबसे ऊंचे इस भू-भाग पर शत्रु के क़दम नहीं पड़ने दिए हैं. आपको यहां प्रकृति से भी रोज कठिन मुक़ाबला करना पड़ता है. हम जानते हैं कि सियाचिन की कुछ चौकियां 20 हजार फुट से भी अधिक ऊंचाई पर हैं. इस क्षेत्र का तापमान माइनस 52 डिग्री सेन्टीग्रेड तक चला जाता है. 15 से 18 फीट तक की बर्फबारी में भी आप सभी जवान डटे रहते हैं. इस निर्जन बर्फीले स्‍थान में हर हाल में आप सब अपने दृढ़ संकल्‍प बनाए रखते हैं. देश के लिए आप सब में समर्पण की जो भावना है उसे जितना भी सराहा जाये, वह कम है.