नई दिल्ली. यमुना नदी के किनारे बना सिग्नेचर ब्रिज 5 नवंबर को लोगों के लिए खुल गया. रविवार को इसके उद्घाटन में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता और बीजेपी दिल्ली अध्यक्ष मनोज तिवारी के बीच झड़प की खबरें थीं. दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर आरोप लगाया. इस बीच ये जानना जरूरी है कि सिग्नेचर ब्रिज की क्या खासियत है कि हर कोई इसका श्रेय लेना चाह रहा है.

बता दें कि साल 2004 में शीला दीक्षित की सरकार इस प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई थी. इसके 14 साल बाद ये बहुप्रतिक्षित ब्रिज का काम पूरा हुआ और जनता के लिए खोला गया. शीला दीक्षित की कैबिनेट ने साल 2010 में दिल्ली में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा था. लेकिन, एक के बाद एक इसमें जो देरी का सिलसिला शुरु हुआ कि ये काम अब जाकर पूरा हुआ.

सिग्नेचर ब्रिज की खासियत
> ब्रिज का मुख्य पिलर 154 मीटर ऊंचा है, जो कि कुतुब मीनार से दोगुनी ज्यादा ऊंचा है. ब्रिज की लंबाई 575 मीटर और चौड़ाई 35.2 मीटर है.
> इस ब्रिज पर 154 मीटर की ऊंचाई पर शीशे का बॉक्स बनाया गया है. इससे पूरा शहर दिखाई देगा.
> इसमें चार लिफ्ट लगाई गई हैं, जिनकी कुल क्षमता 50 लोगों को ले जाने की है.
> ब्रिज पर सेल्फी स्पॉट भी होंगे. 15 स्टे केबल्स हैं, जिन पर ब्रिज का 350 मीटर भाग बगैर किसी पिलर के रोका गया है.
> इस ब्रिज से उत्तरी और उत्तरपूर्वी दिल्ली के बीच यात्रा का समय कम हो जाएगा.

ब्रिज बनने में लागत
साल 2004 में इस पुल की अनुमानित लागत 494 करोड़ रुपए लगाई गई थी, जिसे साल 2007 तक 1,131 करोड़ रुपये कर दिया गया था. साल 2015 में यह बढ़कर 1,594 करोड़ रुपए हो गई. हालांकि, कुछ एक्सपर्ट का मानना है कि इस ब्रिज का प्रस्ताव पहली बार साल 1997 में आया था, जब इसकी लागत 464 करोड़ रुपए आंकी गई थी. हालांकि, काम खत्म होते-होते इसकी लागत 1518.37 करोड़ रुपए आई है.