भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सिंधु जल समझौते से जुड़ी कुछ अहम बातें

अगर भारत पानी रोक दे तो पाक में पानी संकट पैदा हो जाएगा, खेती और जल विद्युत बुरी तरह प्रभावित होंगे

Published date india.com Published: September 27, 2016 5:56 PM IST
Sindhu Waters Treaty between India and Pakistan, related to a few points | भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सिंधु जल समझौते से जुड़ी कुछ अहम बातें

उरी में हुए आतंकी हमले के बाद भारत पाकिस्तान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई के तौर पर सिंधु नदी समझौते की समीक्षा पर विचार कर रहा है। इस हमले के बाद भारत ने पिछले सप्ताह इस संधि को लेकर पाकिस्तान को कड़े शब्दों में कहा  था कि इस संधि को जारी रखने के लिए ‘आपसी विश्वास और सहयोग’ बहुत महत्वपूर्ण है।

यह अंतरराष्ट्रीय जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच दो बड़े युद्धों और तमाम खराब रिश्तों के बीच भी बनी रही है। सिंधु नदी समझौते पर विशेषज्ञों के मत भी अलग-अलग हैं वे इस बात पर एकमत नहीं हैं कि सिंधु नदी समझौते को तोड़ देना चाहिए या नहीं।

भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी समझौते ते जुड़ी कुछ अहम बातें-

Add India.com as a Preferred SourceAdd India.com as a Preferred Source

करीब एक दशक तक विश्व बैंक की मध्यस्थता में चली लंबी बातचीत के बाद 19 सितंबर 1960 को इस समझौते पर हस्ताक्षर किये गए। भारत की ओर से तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल अयूब खान ने हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत दोनो देशों के बीच सिंधु घाटी की 6 नदियों का जल बंटवारा हुआ था। यह भी पढ़ें: पाकिस्तान से सिंधु समझौता तोड़ने पर विचार, पीएम मोदी ने बुलाई अहम बैठक

सिंधु बेसिन की नदियों को दो हिस्सों में बांटा गया था, पूर्वी और पश्चिमी भारत इन नदियों के उद्गम के अधिक क़रीब है ये नदियां भारत से पाकिस्तान की ओर जाती हैं। पूर्वी पाकिस्तान की 3 नदियों का नियंत्रण भारत के पास है इनमें व्यास, रावी और सतलज आती हैं। पश्चिम पाकिस्तान की 3 नदियों का नियंत्रण पाकिस्तान के पास है

जिनमें सिंधु, चिनाब और झेलम आती हैं।

पश्चिमी नदियों पर भारत का सीमित अधिकार

भारत अपनी 6 नदियों का 80% पानी पाकिस्तान को देता है। जबकि भारत के हिस्से में क़रीब 20% पानी आता है। जिसके चलते पाकिस्तान के लिये इस समझौते का महत्व कई गुना ज़्यादा है। इतना ही नहीं पाकिस्तान के दो-तिहाई हिस्से में सिंधु और उसकी सहायक नदियां आती हैं पाकिस्तान की 2.6 करोड़ एकड़ ज़मीन की सिंचाई इन नदियों पर निर्भर है।

अगर भारत पानी रोक दे तो पाक में पानी संकट पैदा हो जाएगा, खेती और जल विद्युत बुरी तरह प्रभावित होंगे। मगर यहां यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि सिंधु नदी का उद्गम स्थल चीन में है और भारत-पाकिस्तान की तरह उसने जल बंटवारे की कोई अंतरराष्ट्रीय संधि नहीं की है। अगर चीन ने सिंधु नदी के बहाव को मोड़ने का निर्णय ले लिया तो भारत को नदी के पानी का 36 फीसदी हिस्सा गंवाना पड़ेगा।

यदी यह करार टूटा तो…

विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक अंतरराष्ट्रीय संधि है। ऐसे में भारत इसे अकेले खत्म नहीं कर सकता। अगर ऐसा हुआ तो इससे भारत को अंतरराष्ट्रीय आलोचनाओं का सामना करना पड़ेगा। साथ ही यह संदेश भी साफ साफ जाएगा कि हम कानूनी रूप से लागू संधि का उल्लंघन कर रहे हैं।

Also Read:

ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें India Hindi की और अन्य ताजा-तरीन खबरें

By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.