बिहार यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का कमाल- मात्र 50 रुपये में सांपों से छुटकारा, घर में नहीं घुसेगा सांप, बनाया 'स्नेक बैरियर'

भारत में हर वर्ष हजारों लोग सांप के काटने से प्रभावित होते हैं, खासकर ग्रामीण इलाकों में. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत में स्नेकबाइट से होने वाली मौतें विश्व में सबसे अधिक हैं.

Published date india.com Published: January 6, 2026 9:44 AM IST
जानिए क्या है ये Snake Detect Barrier
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बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (बीआरएबीयू), मुजफ्फरपुर के वैज्ञानिकों ने एक किफायती और प्रभावी उपकरण विकसित किया है, जो घरों में सांपों के प्रवेश को रोकने में मदद करेगा. इस उपकरण को स्नेक डिटेक्ट बैरियर नाम दिया गया है, जिसकी लागत मात्र 50 रुपये प्रति माह है. यह नवाचार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सांपों के डर से मुक्ति दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

उपकरण का आविष्कार और वैज्ञानिक

यह स्नेक डिटेक्ट बैरियर बिहार विश्वविद्यालय (बीआरएबीयू) के विज्ञान संकाय के पूर्व डीन प्रोफेसर मनेंद्र कुमार और जूलॉजी विभाग के प्राध्यापक ब्रजकिशोर प्रसाद सिंह द्वारा विकसित किया गया है. दोनों वैज्ञानिकों ने सांपों की संवेदी क्षमताओं का अध्ययन कर इस सरल लेकिन प्रभावी जुगाड़ को तैयार किया. यह उपकरण रासायनिक या इलेक्ट्रॉनिक नहीं, बल्कि प्राकृतिक और पर्यावरण अनुकूल सामग्रियों पर आधारित है, जो सांपों को घर के आसपास आने से रोकता है.

कैसे काम करता है स्नेक डिटेक्टर बैरियर?

यह बैरियर सांपों की गंध और कंपन संवेदना पर कार्य करता है. सांप गंध और जमीन की कंपन से खतरा महसूस करते हैं. इस उपकरण में उपयोग की जाने वाली सामग्री सांपों के लिए अप्रिय गंध उत्पन्न करती है और एक तरह का बैरियर बनाती है. घर के दरवाजों, खिड़कियों या दीवारों के आसपास इसे लगाने से सांप प्रवेश नहीं करते. मुख्य रूप से यह एक मिश्रण या स्प्रे जैसा है, जिसे महीने में एक बार उपयोग करना पड़ता है. इससे प्रति माह केवल 50 रुपये का खर्च आता है, जो आम घरों के लिए बेहद किफायती है.

यह घर पर ही तैयार

उपकरण की सबसे बड़ी विशेषता इसकी कम लागत है. बाजार में उपलब्ध महंगे अल्ट्रासोनिक या सोलर स्नेक रिपेलेंट डिवाइस हजारों रुपये के होते हैं, जबकि यह बैरियर घर पर ही आसानी से तैयार किया जा सकता है या कम कीमत पर उपलब्ध होगा. वैज्ञानिकों के अनुसार, सामान्य घरेलू सामग्रियों से इसे बनाया जाता है, जिससे लागत न्यूनतम रहती है. यह विशेष रूप से बिहार जैसे क्षेत्रों के लिए उपयोगी है, जहां बरसात के मौसम में सांपों का खतरा बढ़ जाता है.

पालतू जानवरों के लिए सुरक्षित

वैज्ञानिकों का लक्ष्य इस उपकरण को पेटेंट करवाकर बड़े पैमाने पर उपलब्ध कराना है. जनता से अपील की गई है कि वे इस तरह के सरल उपाय अपनाएं और सांपों को मारने के बजाय दूर भगाने का प्रयास करें, क्योंकि सांप पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. यह सस्ता उपकरण न केवल जान बचाएगा, बल्कि लोगों में सांपों का डर भी कम करेगा. वैज्ञानिकों ने इसे पर्यावरण और पालतू जानवरों के लिए सुरक्षित बताया है, क्योंकि इसमें कोई जहरीला रसायन नहीं उपयोग होता.

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