तिरुवनंतपुरम/नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति देसाई ने बुधवार को कहा कि वह शनिवार को 10 से 50 की आयु वर्ग (पहले निषिद्ध) की छह अन्य महिलाओं के साथ सबरीमाला मंदिर जाएंगी. उनकी इस घोषणा का एक दक्षिणपंथी कार्यकर्ता ने इसका कड़ा विरोध किया है जिससे ताजे टकराव का डर पैदा हो गया है.

शनिधाम शिंगणापुर मंदिर, हाजी अली दरगाह, महालक्ष्मी मंदिर और त्र्यंबकेश्वर शिव मंदिर सहित कई धार्मिक जगहों पर महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दिलाने के अभियान की अगुवाई कर चुकीं तृप्ति ने ऐसे समय यह घोषणा की है जब सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले पर स्थगन से एक बार फिर इनकार कर दिया है. शीर्ष अदालत ने सबरीमाला में भगवान अयप्पा के मंदिर में सभी उम्रवर्गों की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी थी.

इस बीच, केंद्रीय संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने सबरीमाला मुद्दे पर ‘समग्र रवैया’ अपनाए जाने पर बल दिया ताकि लोगों की भावनाएं आहत नहीं हों. दिल्ली में यह पूछे जाने पर कि हालात से निपटने के लिये क्या अध्यादेश लाए जाने की आवश्यकता है तो शर्मा ने कहा, ‘‘ राज्य (केरल) सरकार को उस पर (अध्यादेश के बारे में) फैसला करना है और जरूरत पड़ने पर सही समय पर केंद्र सरकार निश्चित तौर पर हस्तक्षेप करेगी.’’

सबरीमाला में दो महीने तक चलने वाला मंडला-मक्करविलक्कू तीर्थाटन सत्र 17 नवंबर को प्रारंभ होगा. उस दौरान देशभर से लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं. शीर्ष अदालत द्वारा अपने फैसले पर स्थगन लगाने से इनकार करने के बाद अब यह देखना है कि 10-50 वर्ष आयु वर्ग की महिलाएं छह किलोमीटर की श्रमसाध्य दूरी को पैदल चलकर पूरा करने के बाद मंदिर में प्रवेश कर पाएंगी या नहीं. शीर्ष अदालत के 28 सितंबर के फैसले के बाद जब यह मंदिर खोला गया था तब निलक्कल और पांबा में ऐसी ही कोशिशों को प्रदर्शनकारियों ने विफल कर दिया था.

देसाई ने मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को एक ईमेल भेजकर सुरक्षा की मांग की है क्योंकि उन्हें मंदिर जाने के दौरान अपने ऊपर हमला होने का डर है. तृप्ति ने कहा है, ‘‘हम सबरीमाला मंदिर में दर्शन के बिना महाराष्ट्र नहीं लौटेंगे. हमें सरकार पर विश्वास है कि वह हमें सुरक्षा मुहैया कराएगी.’’ उन्होंने कहा कि हमें सुरक्षा मुहैया कराने और मंदिर ले जाने की जिम्मेदारी राज्य सरकार और पुलिस की है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने सभी आयु वर्ग की महिलाओं को मंदिर में पूजा की अनुमति दे दी है. मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि उसे ई-मेल मिला है और यह संबंधित अधिकारियों को भेजा गया है. तृप्ति ने मंदिर यात्रा के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी एक मेल भेजा है.

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इस बीच मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे संगठनों में शामिल ‘अयप्पा धर्म सेना’ के अध्यक्ष राहुल ईश्वर ने कहा कि अयप्पा के श्रद्धालु तृप्ति और उसके समूह के पवित्र मंदिर में प्रवेश और पूजा के किसी भी प्रयास का ‘गांधीवादी तरीके’ से विरोध करेंगे. उन्होंने तिरुवनंतपुरम में कहा, ‘‘हम जमीन पर लेट जाएंगे. हम विरोध करेंगे और किसी भी कीमत पर उन्हें मंदिर में पूजा करने से रोकेंगे.’’

सबरीमला मंदिर में 10-50 साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर सदियों पुरानी पाबंदी को हटाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने के माकपा की अगुवाई वाली केरल सरकार के फैसले के खिलाफ विपक्षी कांग्रेस, भाजपा, आरएसएस और दक्षिणपंथी संगठन कई प्रदर्शन कर चुके हैं. इस मंदिर को अक्टूबर में चार दिनों और इस महीने दो दिनों के लिए पूजा के वास्ते खोला गया था जब प्रदर्शन किया गया था.

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सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने के अपने फैसले पर बुधवार को रोक लगाने से इंकार कर दिया. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष एक वकील ने न्यायालय के 28 सितंबर के फैसले पर रोक लगाने का अनुरोध किया. इस पर पीठ ने कहा कि 22 जनवरी तक इंतजार करें जब संविधान पीठ पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करेगी. अधिवक्ता मैथ्यूज जे नेदुंपरा ने इस मामले का उल्लेख किया था. उन्होंने नेशनल अयप्पा डेवटीज (वीमेन्स) एसोसिएशन की ओर से पुनर्विचार याचिका दायर कर रखी है.

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प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने मंगलवार को ही न्यायाधीश कक्ष में इन पुनर्विचार याचिकाओं की विवेचना करने के बाद इन पर 22 जनवरी को सुनवाई करने का निर्णय किया था. पीठ ने इसके साथ ही स्पष्ट किया था कि इस दौरान शीर्ष अदालत के 28 सितंबर के फैसले और आदेश पर कोई रोक नहीं रहेगी.