मुंबई: देश के बहुचर्चित सोहराबुद्दीन एनकांउटर मामले में सीनियर पुलिस अफसरों को बड़ी राहत मिली है. बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को संदिग्ध माफिया सोहराबुद्दीन शेख, उसकी पत्नी और सहयोगी के मुठभेड़ मामले में गुजरात के पूर्व एटीएस प्रमुख डीजी वंजारा और चार अन्य पुलिस अधिकारियों को आरोपमुक्त करने का निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा. ये सभी पुलिस अधिकारी गुजरात और राजस्थान से थे.

सोहराबुद्दीन मामले में एक और गवाह मुकरा, अब तक 71 गवाहों ने बदला बयान

इन पुलिस अधिकारियों को आरोप मुक्त करने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली सोहराबुद्दीन शेख के भाई रुबाबुद्दीन और केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की पांच पुनरीक्षण याचिकाओं को हाईकोर्ट ने यह कहकर खारिज कर दिया कि इसमें कोई दम नहीं है.

न्यायमूर्ति एएम बदर ने गुजरात काडर के आईपीएस अधिकारी विपुल अग्रवाल को राहत देते हुए साल 2005-2006 में सोहराबुद्दीन शेख, उसकी पत्नी कौसर बी और उनके सहयोगी तुलसीराम प्रजापति के फर्जी मुठभेड़ मामले में आरोपमुक्त करने का उनका अनुरोध स्वीकार कर लिया. इस मामले में अब तक आरोप मुक्त हुए अधिकारियों में वंजारा के अलावा गुजरात पुलिस से राजकुमार पांडियन, एन के अमीन एवं अग्रवाल और राजस्थान पुलिस से दिनेश एम एन एवं दलपत सिंह राठौड़ शामिल हैं.

सोहराबुद्दीन मामला: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने न्यायाधीश के फिर बदलने पर उठाये सवाल

रुबाबुद्दीन ने दिनेश, पांडियन और वंजारा को आरोप मुक्त किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी. अमीन और राठौड़ को आरोप मुक्त करने के आदेश को चुनौती देने वाली शेष दो पुनरीक्षण याचिकाएं सीबीआई ने दायर की थी. हाईकोर्ट ने बचाव पक्ष की दलीलों पर गौर किया.

बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकीलों महेश जेठमलानी, शिरीष गुप्ते, राजा ठाकरे एवं निरंजन मुंदर्गी ने दावा किया कि सीबीआई ने सबूत गढ़े और मामले से मेल खाते मनगढ़ंत तथ्य रखे. उन्होंने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष की एजेंसियां मामले से संबद्ध अधिकतर अधिकारियों पर आरोप लगाने से पहले पूर्ववर्ती सरकार से मंजूरी लेने में भी नाकाम रहीं.

सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह और वकील संदेश पाटिल और रुबाबुद्दीन शेख की ओर से उनके वकील गौतम तिवारी ने दलील दी कि निचली अदालत ने इन अधिकारियों को आरोपमुक्त करने के अपने फैसले में भूल की. न्यायमूर्ति बदर ने सभी छह याचिकाओं पर 16 जुलाई को सुनवाई पूरी करते हुए कहा था कि इस मामले में फैसला बाद में सुनाया जाएगा.

खास बातें
– सीबीआई ने हाईकोर्ट को बताया था कि सोहराबुद्दीन शेख और प्रजापति राजस्थान एवं गुजरात में मार्बल कारोबारियों से जबरन वसूली करते थे
– सीबीआई के आरोपपत्र में कहा गया कि वे स्थानीय पुलिस के लिए भी जबरन वसूली करते थे हालांकि बाद में उनके रिश्ते में खटास आ गई
– गुजरात पुलिस ने उन्हें रास्ते से हटाने का फैसला किया
– सीबीआई के मुताबिक, नवंबर 2005 में सोहराबुद्दीन शेख और उसकी पत्नी कौसर बी जब बस से हैदराबाद से महाराष्ट्र के सांगली जा रहे थे
– इस दौरान तब गुजरात एवं राजस्थान की पुलिस ने दोनों को रोका और उनका अपहरण कर लिया तथा गांधीनगर के पास सोहराबुद्दीन को गोली मार दी.
– सीबीआई के अनुसार कुछ दिन बाद कौसर बी की भी हत्या कर दी गई और सबूत खत्म करने के इरादे से उसके शव को जला दिया गया
– मुठभेड़ के वक्त पुलिस ने दावा किया कि सोहराबुद्दीन शेख के आतंकवाद से संबंध थे.
-केंद्रीय एजेंसी ने अपने आरोपपत्र में दावा किया कि गुजरात एवं राजस्थान के अधिकारियों के उसी समूह के इशारे पर दिसंबर 2006 में राजस्थान पुलिस ने ऐसी ही एक अन्य मुठभेड़ में प्रजापति को मार गिराया था.