मुंबई. केन्द्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के विशेष न्यायाधीश एस.जे. शर्मा के लिए गैंगस्टर सोहराबुद्दीन शेख, उसकी पत्नी कौसर बी और उसके सहयोगी तुलसी प्रजापति की कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्याओं (Sohrabuddin encounter case) के 22 आरोपियों को शुक्रवार को बरी करना उनके करियर का अंतिम फैसला रहा. इसी महीने सेवानिवृत्त हो रहे न्यायाधीश शर्मा ने अपने फैसले में कहा, ‘‘यह मेरा अंतिम फैसला है…’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि (पीड़ितों के) एक परिवार ने एक बेटा, भाई गंवा दिया… लेकिन यह साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं कि ये आरोपी अपराध में शामिल थे.’’ न्यायाधीश ने कहा कि उन्हें शेख और प्रजापति के परिवारों के लिए अफसोस है क्योंकि ‘‘तीन लोगों की जान चली गई.’’ उन्होंने कहा कि लेकिन व्यवस्था की मांग है कि अदालत केवल साक्ष्यों के आधार पर चलती है.

सोहराबुद्दीन एनकाउंटर: सबूतों के अभाव में सभी 22 आरोपी सीबीआई कोर्ट से बरी

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी हुए थे गिरफ्तार
सभी आरोपी वर्षों तक चली सुनवाई के दौरान जमानत पर रिहा रहे. इनमें ज्यादातर गुजरात और राजस्थान के पुलिस अधिकारी हैं. सीबीआई के विशेष जज ने शुक्रवार को अपना फैसला सुनाते वक्त भी कहा था कि अदालत को पीड़ितों के परिवारों के लिए दुख है, लेकिन यह सिस्टम की मांग है कि कोर्ट सिर्फ सबूतों के आधार पर ही काम करे. विशेष जज ने अपने फैसले में कहा था कि अभियोजन यह साबित करने में असफल रहा है कि इन तीन लोगों की हत्या में कोई साजिश थी और आरोपियों की उसमें कोई भूमिका थी. आपको बता दें कि सोहराबुद्दीन समेत 3 लोगों के फर्जी एनकाउंटर का यह मामला काफी चर्चित रहा है. इस मुकदमे के दौरान गुजरात और राजस्थान पुलिस के 21 कर्मियों सहित सभी 22 आरोपी जमानत पर बाहर थे. मुकदमे की 13 साल तक चली सुनवाई के दौरान इसमें कई मोड़ आए. अभियोजन पक्ष के 92 गवाह मुकर गए. जुलाई 2010 में अमित शाह भी इस सिलसिले में गिरफ्तार किए गए थे, लेकिन दिसंबर 2014 में अदालत ने उन्हें आरोप मुक्त कर दिया.

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पुलिसवालों ने एक-एक कर तीनों की हत्या की
हैदराबाद से महाराष्ट्र के सांगली लौट रहे तीनों पीड़ितों को 22-23 नवंबर 2005 की दरमियानी रात पुलिस की एक टीम ने हिरासत में लिया था. दंपति को एक वाहन में ले जाया गया और प्रजापति को दूसरे वाहन में ले जाया गया. इस मामले में जांच एजेंसी सीबीआई ने कहा था कि गुजरात और राजस्थान पुलिस की एक संयुक्त टीम ने 26 नवंबर 2005 को शेख की कथित तौर पर हत्या कर दी और इसके तीन दिन बाद कौसर बी की हत्या कर दी गई. उदयपुर की केंद्रीय जेल में बंद प्रजापति की 27 दिसंबर 2006 को गुजरात-राजस्थान सीमा पर एक मुठभेड़ में हत्या कर दी गई. सीबीआई ने कहा था कि ये 22 आरोपी उस टीम का हिस्सा थे, जिन्होंने तीनों का अपहरण किया और बाद में मुठभेड़ में उन्हें मार दिया. इन 22 आरोपियों में से 21 गुजरात तथा राजस्थान के जूनियर पुलिस कर्मी हैं. 22वां आरोपी गुजरात के फार्म हाउस का मालिक है, जहां कथित रूप से हत्या किए जाने से पहले शेख और कौसर बी को अवैध हिरासत में रखा गया था.

(इनपुट – एजेंसी)