नई दिल्ली| समय से पहले पहुंचकर अंदर प्रवेश करने वाले लोग आराम से कुर्सियों पर विराजमान थे लेकिन कुछ लोगों के लिए मामूली देरी ने भी परेड देखने के उनके मौके पर पानी फेर दिया. भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस ने नियत समय से पहले ही कुछ प्रवेश द्वारों को बंद कर दिया था जिससे लोगों की बेचैनी बढ़ने लगी थी और वे दूसरे द्वारों की तरफ भागते-दौड़ते नजर आए. Also Read - Tamil Nadu Elections: पीएम मोदी बोले- भारतीय इतिहास के महत्वपूर्ण क्षण में होने जा रहे तमिलनाडु विधानसभा चुनाव

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अथक प्रयास करने के बाद भी जिन लोगों को प्रवेश नहीं मिल सका वे जनसाधारण वाली पंक्ति में खड़े हो गए. प्रवेश पाकर खुश होने वाले लोगों के लिए राहें इतनी आसान नहीं थी. अंदर जाकर वे ऐसी जगह पहुंच गए जहां से कुछ भी नजर आना संभव नहीं था. Also Read - चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping आ सकते हैं भारत, Brics देशों को लेकर कही ये बात

इतने पर भी लोगों ने हार नहीं मानी और वे फिर दूसरे द्वार की तरफ जाने लगे. हर जगह से मनाही मिलने पर आखिरकार कई लोग निराश होकर घर लौटने लगे. सांता क्लॉज का रूप धारण करके आए नजफगढ़ के अनिल सुरैया ने कहा कि वह हर मौके पर इसी तरह आते हैं. उनका मकसद शांति और सौहार्द का संदेश देना है. हालांकि उन्हें अंदर प्रवेश नहीं मिल सका.

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वहीं कनाडा से आई जेनिथ कहती हैं कि उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया, लेकिन वह इससे निराश नहीं हैं. उन्हें बाहर का माहौल देखकर भी उतनी ही खुशी मिल रही है. वह इससे दो साल पहले भी भारत आईं थीं तब उन्होंने बहुत लुत्फ उठाया था.

जेनिथ ने कहा कि उन्हें भारत से बेहद प्यार है. यहां के लोगों की राष्ट्र के प्रति भावनाएं देखकर वह बहुत प्रभावित होती हैं. उनके देश में भी कनाडा दिवस मनाया जाता है पर उसमें सेना की कोई भूमिका नहीं होती. वहां लोग जुदा अंदाज में जश्न मनाते हैं.

दूसरी तरफ अंदर बैठे उत्साहित लोग तालियों और नारेबाजियों के जरिए परेड के प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन कर रहे थे.

एक महिला इस सबमें इतनी मशरूफ हो गई थी कि उसे ध्यान ही नहीं रहा कि उसकी तीन साल की बच्ची कब बाहर निकल गई. लेकिन पुलिस की मुस्तैदी ने बच्ची को उस भीड़ में भी उसके परिवार से मिलवा दिया. एक महिला कॉन्स्टेबल ने बच्ची को सकुशल उसकी मां के सुपुर्द कर दिया. हालांकि महिला को पुलिस की फटकार भी खानी पड़ी.