नई दिल्ली। पूर्व लोकसभा स्पीकर और सीपीएम नेता सोमनाथ चटर्जी का सोमवार सुबह निधन हो गया. 89 साल के सोमनाथ किडनी की बीमारी के चलते काफी लंबे समय से कोलकाता के अस्पताल में भर्ती थे. वह 2004 से 2009 तक लोकसभा के अध्यक्ष रह चुके थे. चटर्जी माकपा के टिकट पर लोकसभा के लिए 10 बार चुने गए.

पहली बार निर्दलीय के तौर पर जीता चुनाव

उनके संसदीय सफर की शुरुआत 1971 में हुई जब उन्होंने पश्चिम बंगाल के वर्धमान सीट पर माकपा के समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत हासिल की थी. वह सीट उनके पिता के निधन के बाद खाली हुई थी. उन्हें अपने जीवन में सिर्फ एक बार पराजय का सामना करना पड़ा, जब 1984 में जादवपुर सीट से ममता बनर्जी ने उन्हें हरा दिया था. ममता बनर्जी इसी जीत के साथ भारतीय राजनीति में उभरीं.

मनमोहन सरकार को ‘बचाने’ वाले लोकसभा के पूर्व स्पीकर सोमनाथ चटर्जी नहीं रहे

सोमनाथ चटर्जी देश के पहले ऐसे कम्युनिस्ट नेता थे जो लोकसभा के अध्यक्ष बने.अपने जीवन के अधिकांश समय मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) से जुड़े रहे सोमनाथ चटर्जी लोकसभा के सबसे उत्कृष्ट वक्ताओं में से एक थे. उनके पिता एन सी चटर्जी कभी ‘अखिल भारतीय हिंदू महासभा’ के अध्यक्ष रहे थे.

2008 में सीपीएम ने किया बर्खास्त

सोमनाथ चटर्जी यूपीए-1 सरकार के दौरान 2004 में सर्वसम्मति से लोकसभा अध्यक्ष चुने गए थे. माकपा नेता ज्योति बसु के करीबी रहे चटर्जी को 2008 में माकपा ने पार्टी के रुख से गंभीर रूप से समझौता करने के सिलसिले में पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था. उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने से मना कर दिया था. उनका मानना था कि लोकसभा अध्यक्ष का पद किसी दलगत राजनीति से स्वतंत्र और निष्पक्ष है.

इस्तीफा देने से कर दिया था इनकार

जुलाई 2008 में माकपा ने यूपीए सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था. इसके बाद पार्टी ने उन्हें लोकसभा अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के लिए कहा था. चटर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था. प्रकाश करात तब माकपा के महासचिव थे. चटर्जी ने 23 जुलाई, 2008 को अपने जीवन का सबसे दुखद दिन बताते हुए एक बयान में कहा था कि लोकसभा का अध्यक्ष अन्य सदनों के अध्यक्ष के तरह ही किसी एक पार्टी के लिए काम नहीं करता है और न ही किसी राजनीतिक दल का प्रतिनिधित्त्व करता है.

उन्हीं की पहल पर 5 जुलाई 2006 से शून्यकाल की कार्यवाही का सीधा प्रसारण शुरू किया गया. चटर्जी के कार्यकाल के दौरान ही जुलाई, 2006 में पूर्ण रूप से 24 घंटे चलने वाला लोकसभा टेलीविजन चैनल शुरू किया गया.
चटर्जी 1989 से 2004 तक लोकसभा में माकपा के नेता थे.