नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी के निधन पर दुख जताते हुए कहा कि सोमनाथ चटर्जी अपने आप में एक संस्था थे जिनका सभी पार्टियों के लोग बहुत अधिक सम्मान करते थे. सोमनाथ चटर्जी को रविवार की शाम दिल का दौरा पड़ा था. लंबे समय से बीमार चल रहे चटर्जी को जीवन रक्षक उपकरणों पर रखा गया. आज सुबह उनका निधन हो गया.

राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, ‘मैं 10 बार सांसद रहे और लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी के निधन पर दुख प्रकट करता हूं. वह एक संस्था थे. सभी पार्टियों के सांसद उनका बहुत सम्मान और सराहना करते थे.’ उन्होंने कहा, ‘दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ है.’ चटर्जी का आज कोलकाता के एक अस्पताल में निधन हो गया. वह 89 वर्ष के थे. वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे और पिछले कुछ दिन से वेंटिलेटर पर थे. उनके परिवार में पत्नी एवं दो बेटियां हैं. सोमनाथ चटर्जी संप्रग की पहली सरकार के समय 2004 से 2009 तक लोकसभा अध्यक्ष रहे.

मनमोहन सरकार को ‘बचाने’ वाले लोकसभा के पूर्व स्पीकर सोमनाथ चटर्जी नहीं रहे

नहीं हो रहा था इलाज का असर
हॉस्पिटल के अधिकारी ने बताया कि पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी को रविवार की शाम ‘‘दिल का हल्का दौरा’’ पड़ा था जिसके बाद उनकी हालत बिगड़ गई और आज सुबह करीब सवा आठ बजे उनका निधन हो गया. चटर्जी को किडनी से संबंधित बीमारी थी और उन्हें गत मंगलवार को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अधिकारी ने मीडिया को बताया, ‘‘उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था और बीती रात से उनपर इलाज का कोई असर नहीं हो रहा था. आज सुबह करीब सवा आठ बजे उनका निधन हो गया.’’

दस बार लोकसभा के सांसद रहे
पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी को कल दिल का दौरा पड़ा था. उनका आईसीयू में इलाज चल रहा था. लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष को पिछले महीने मस्तिष्क में रक्तस्राव हुआ था. उनका पिछले 40 दिन से इलाज चल रहा था और स्वास्थ्य में सुधार होने के चलते उन्हें तीन दिन के लिए अस्पताल से छुट्टी दी गई थी. अधिकारी ने बताया कि पिछले मंगलवार को उनकी हालत बिगड़ गई और उन्हें फिर से अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा.

दस बार लोकसभा के सांसद रहे चटर्जी माकपा की केंद्रीय समिति के सदस्य थे. वह 1968 में माकपा में शामिल हुए थे. माकपा के संप्रग-1 सरकार से समर्थन वापस ले लेने के बावजूद चटर्जी ने लोकसभा के अध्यक्ष के पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था. इस वजह से वरिष्ठ नेता को वर्ष 2008 में माकपा से निष्कासित कर दिया गया था.