नई दिल्ली: विश्व में वेश्यावृति के लिए कई ऐसे स्थान हैं जो काफी प्रसिद्ध हैं. पश्चिम बंगाल का सोनागाछी इलाका एशिया का सबसे बड़ा वेश्यावृति का क्षेत्र है. यहां अगर आंकड़ों की बात करें तो लगभग 10,000 से अधिक सेक्स वर्कर यहां काम कर रही हैं. साथ ही कई मेल वर्कर भी वेश्यावृति के धंधे में लिप्त हैं. सोनागाछी नॉर्थ कोलकाता के शोभाबाजार क्षेत्र में स्थित है.Also Read - गणतंत्र दिवस परेड से बंगाल की झांकी हटाई गई, केंद्र के फैसले से ‘स्तब्ध’ ममता बनर्जी ने PM मोदी को लिखा पत्र

सोनागाछी का बांग्ला भाषा में मतलब होता है सोने का पेड़. किवदंतियों के मुताबिक कलकता शहर के शुरुआती दिनों में एक कुख्यात डकैत था जो अपन मां के साथ यहां रहा करता था. उनकी मृत्यु के बाद यह कहा जाता है कि उसने अपनी झोपड़ी में एक आवाज सुनी थी. इसमें कुख्यात डाकू अपनी मां से कहता है कि मां मैं एक गाजी बन गया हूं. यहीं से सोना गाजी की शुरुआत हुई. यहां डकैत ने अपनी मां की याद में एक मस्जिद का निर्माण करवाया. हालांकि बाद में सोना गाजी क्षेत्र काफी व्यस्तम हो गया और सोनागाजी परिवर्तित हो गया सोनागाछी में. Also Read - West Bengal में कोरोना प्रतिबंध 31 जनवरी तक बढ़ाए गए, शादी में 200 मेहमानों को इजाजत

बता दें कि हर साल पश्चिम बंगाल में दुर्गापूजा के दौरान मूर्ति निर्माण में इन क्षेत्रों की मिट्टियों को मां की मूर्ति में शामिल किया जाता है. लेकिन कोरोना महामारी ने सोनागाछी में वेश्यावृति में लिप्त लोगों की कमर तोड़ दी है. यहां के 89 प्रतिशत सेक्स वर्कर कोरोना महामारी के दौरान कर्ज के तले दबे हुए हैं. साथ ही महामारी के कारण सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए लोग खुद भी सोनागाछी का रुख नहीं कर रहे हैं. Also Read - Photos: देश में मकर संक्रांति, पोंगल, माघ बीहू, भोगी और उत्तरायण पर्व के ब‍िखरे रंग, लाखों लोगों ने स्‍नान किया

एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग एनजीओ के डाटा के मुताबिक यहां 89 प्रतिशत सेक्स वर्कर कर्ज के जाल में फंसी हुई हैं. उन्होंने जीवनयापन के लिए दलालों और वेश्यालयों के मालिकों से उधार लिया है. इस कारण उनका शोषण और हो सकता है. रिपोर्ट की मानें तो 73 फीसदी सेक्स वर्कर देह व्यापार को त्यागना भी चाहती है, लेकिन वह चाहकर भी ऐसा नहीं कर पाती हैं, क्योंकि उनके उपर काफी कर्ज है और उन्हें भविष्य में समाज द्वारा न स्वीकारे जानें डर भी रहता है.