नई दिल्ली। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी साल 2019 के आम चुनाव से पहले बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए के खिलाफ व्यापक मोर्चा बनाने की चर्चा के बीच आज डिनर पार्टी दे रही है. इसमें 17 विपक्षी दलों के नेताओं के पहुंचने की संभावना है. कांग्रेस सूत्रों के अनुसार आंध्र प्रदेश की सत्तारुढ़ तेलुगू देशम पार्टी( तेदेपा), बीजेडी और टीआरएस के नेताओं को निमंत्रित नहीं किया गया है. टीडीपी ने हाल ही में अपने मंत्रियों को नरेंद्र मोदी सरकार से हटा लिया है लेकिन वह एनडीए का घटक बनी हुई है. बीजेडी और टीआरएस का ओड़िशा और तेलंगाना में सरकार है.

सूत्रों के मुताबिक झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड विकास मोर्चा के नेता बाबूलाल मरांडी, झारखंड मुक्ति मोर्चा के हेमंत सोरेन, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख जीतन राम मांझी बैठक में पहुंचेंगे. मांझी ने हाल ही में एनडीए का साथ छोड़कर लालू प्रसाद के आरजेडी के साथ हाथ मिला लिया. 

सोनिया गांधी की कोशिशों को झटका, डिनर पार्टी में शामिल नहीं होंगी ममता

सोनिया गांधी की कोशिशों को झटका, डिनर पार्टी में शामिल नहीं होंगी ममता

लालू प्रसाद के बेटे और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के इसमें पहुंचने की संभावना है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है. तृणमूल के सुदीप बंदोपाध्याय, द्रमुक की कनिमोई, सपा के रामगोपाल यादव, माकपा के सीताराम येचुरी, भाकपा के डी राजा, जेडीएस, केरल कांग्रेस, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, रिवोल्युशनरी सोशलिस्ट पार्टी और आरएलडी के नेताओं के भाग लेने की संभावना है.

सोनिया की मुहिम

टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी इस भोज में शामिल नहीं हो रही हैं जिसे इस मुहिम के लिए झटका माना जा रहा है. हालांकि टीएमसी की ओर से डेरेक ओ ब्रायन और सुदीप बंधोपाध्याय मौजूद रहेंगे. पार्टी की ओर से बताया जा रहा है कि आज ममता दार्जिलिंग के दौरे पर रहेंगी. ममता बनर्जी भी बीजेपी के खिलाफ एकजुटता की मुहिम चला चुकी हैं. इसके लिए उन्होंने टीआरएस से भी अपील की थी. ऐसे में देखना अहम होगा कि सोनिया की डिनर डिप्लोमैसी कितना रंग दिखा पाती है.

2019 लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने पूरी तरह कमर कस ली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी को सत्ता से दूर रखने के लिए सोनिया गांधी अभी से पूरे विपक्ष को साथ लाने की कवायद में लगी हुई हैं. सोनिया गांधी ने विपक्षी दलों के नेताओं को डिनर पार्टी में बुलाया है ताकि एकता का संदेश दिया जा सके. इस कवायद के बीच ममता बनर्जी का इस कार्यक्रम से दूरी बना लेना कांग्रेस के लिए किसी झटके के कम नहीं. पार्टी की ओर जारी बयान में कहा गया है कि ममता इस दिन दार्जिलिंग और उसके आसपास के इलाके के दौरे पर रहेंगी.

बड़ी पार्टियां नदारद, क्या मुहिम का दिखेगा असर? 

सोनिया की डिनर पार्टी में अधिकतर छोटे दल ही शामिल हैं. अधिकतर पार्टियां अपने राज्यों में सरकार में भी शामिल नहीं हैं. लेफ्ट को हाल ही में त्रिपुरा में जबरदस्त झटका लगा है. प. बंगाल में भी उसकी हालत सही नहीं है. उधर, ममता बनर्जी की भी अपनी महात्वाकांक्षाएं हैं और यह किसी से छुपा नहीं है कि वह विपक्ष को लीड करना चाहती हैं. इसी तरह इसमें टीडीपी जैसी बड़ी पार्टी भी शामिल नहीं है, बीएसपी ने भी इससे दूरी बना ली है. ऐसे में ये देखना अहम होगा कि एंटी बीजेपी मुहिम कितना असर दिखा पाती है.