नई दिल्ली। 5 मई को भारत अपने पड़ोसी देशों को एक बड़ा तोहफा देने की तैयारी में है. भारत दक्षिण एशियाई सैटेलाइट को लॉन्च करेगा जिसका इस्तेमाल दक्षिण एशियाई देश करेंगे. इसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मन की बात कार्यक्रम में की थी. पहले इसका नाम SAARC सैटेलाइट रखा गया था लेकिन पाकिस्तान के इस प्रोजेक्ट से बाहर जाने के कारण इसका नाम दक्षिम एशियाई सैटेलाइट किया गया. इसका प्रक्षेपण इसरो 5 मई को श्रीहरिकोटा से किया जाएगा.

प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में कहा कि पांच मई को पहला दक्षिण एशियाई सैटेलाइट लॉन्च कर पड़ोसी देशों को ‘अमूल्य उपहार’ देगा. यह सैटेलाइट सबका साथ-  सबका विकास के सिद्धांत पर चलते हुए तैयार किया गया है. पीएम मोदी ने कहा कि पड़ोसी देशों के बीच सहयोग होना चाहिए और उनका भी विकास होना चाहिए. इस सैटेलाइट को कूटनीतिक स्तर पर भारत के मास्टर स्ट्रोक की तरह देखा जा रहा है.

दक्षिण एशियाई सैटेलाइट की खास बातें

  • 2230 किलो के इस सैटेलाइट को तीन साल में बनाया गया है. इसकी कुल लागत 235 करोड़ रुपए है.
  • इससे प्राकृतिक संसाधनों की मैपिंग की जा सकेगी. टेली मेडिसिन, शिक्षा में सहयोग बढ़ेगा. भूकंप, चक्रवात, बाढ़, सुनामी की दशा में संवाद-लिंक का माध्यम होगी.
  • दक्षिण एशियाई देशों की डीटीएच, वीसैट क्षमता में भी इजाफा करेगा.
  • यह अंतरिक्ष आधारित टेक्नोलॉजी के बेहतर इस्तेमाल में मदद करेगा.
  • इसमें भागीदारी देशों के बीच हॉटलाइन उपलब्ध करवाने की भी क्षमता है.