नई दिल्ली: राज्यसभा में शुक्रवार को सपा सदस्य विश्वंभर प्रसाद निषाद ने 2021 की जनगणना जातिवार कराए जाने तथा अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण में क्रीमी लेयर की सीमा समाप्त किए जाने की मांग की. सपा सदस्य निषाद ने शून्यकाल में यह मांग की. Also Read - लॉकडाउन: महिला सब-इंस्‍पेक्‍टर ने मजदूर के साथ किया कुछ ऐसा, एसपी ने किया लाइन अटैच

राज्यसभा में सपा सदस्य ने कहा कि देश भर में ओबीसी आबादी 54 प्रतिशत से अधिक है और इस वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण होने के बावजूद विभिन्न सेवाओं में उनका प्रतिनिधित्व काफी कम है. उन्होंने न्यायपालिका और विश्वविद्यालयों में भी आरक्षण की मांग की. Also Read - एनपीआर और जनगणना का कार्य अगले आदेश तक स्थगित, 1 अप्रैल से शुरू होना था काम 

बीजद सदस्य सस्मित पात्रा ने अमेरिका और तालिबान के बीच हुए समझौते का जिक्र करते हुए आशंका जतायी कि इससे अफगानिस्तान में भारतीय हितों को नुकसान हो सकता है. पात्रा ने कहा कि इस समझौते के प्रभावी होने की स्थिति में पाकिस्तान वहां आतंकवादी गतिविधियों को बढावा दे सकता है. उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में वहां बड़े पैमाने पर निवेश भी किया है. उन्होंने सरकार से मांग की कि वह ‘‘पहले पड़ोसी’’ की अपनी नीति पर पुनर्विचार करे. Also Read - मध्‍य प्रदेश विधानसभा में शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष की गैरमौजूदगी में विश्‍वास मत हासिल किया

सभापति एम वेंकैया नायडू ने विदेश मंत्री से कहा कि उसे इस संबंध में स्थिति को स्पष्ट करना चाहिए.

भाजपा सदस्य किरोड़ीलाल मीणा ने पिछले दिनों राजस्थान और अन्य राज्यों में ओलावृष्टि तथा बारिश के कारण फसलों की बड़े पैमाने पर हुई बर्बादी का मुद्दा उठाया और किसानों को पर्याप्त मुआवजा देने की मांग की. मीणा ने कहा कि राजस्थान के 18 जिलों में फसलें चौपट हो गयी हैं और वहां पशुओं के लिए चारे का भी संकट पैदा हो गया है. उन्होंने कहा कि किसानों को मिलने वाला मुआवजा अपर्याप्त है. उन्होंने दावा किया कि राजस्थान सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी हिस्सेदारी जमा नहीं की. इस वजह से किसानों को मुआवजा नहीं मिल रहा है. उन्होंने चारा डिपो खोले जाने की भी मांग की.

भाजपा सदस्य महेश पोद्दार ने हजारों छात्रों द्वारा आत्महत्या किए जाने का मुद्दा उठाया. बीजद के प्रसन्ना आचार्य, मनोनीत सोनल मान सिंह सहित अन्य सदस्यों ने भी लोक महत्व से जुड़े अलग अलग मुद्दे उठाए.