Social Media Addiction: आज के समय में बच्चों में सोशल मीडिया की लत एक बड़ी परेशानी बन रहा है. स्मार्टफोन पर जरूरत से ज्यादा समय बिताने की वजह से इसका बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है. कई बच्चों में डिप्रेशन, चिंता, चिड़चिड़ापन और ध्यान की कमी जैसे लक्षण आम हो गए हैं.
साल 2025 में ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए टिकटॉक, एक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, स्नैपचैट और थ्रेड्स समेत कई सोशल मीडिया साइट्स के इस्तेमाल पर बैन लगा दिया था. अब इसमें कुछ और देशों का नाम भी जल्द शामिल होने वाले हैं.
रॉयटर्स के मुताबिक, दुबई में जारी विश्व सरकार शिखर सम्मेलन में स्पेन और ग्रीस ने मंगलवार को ने बच्चों के सोशल मीडिया यूज करने पर बैन का प्रस्ताव रखा गया है. इस प्रस्ताव से साबित होता है कि अब यूरोपीय देश सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ सख्ती से पेश आ रहे हैं. उनका कहना है कि कंपनियों ने इन प्लेटफॉर्म्स को इस तरह डिजाइन किया है कि बच्चों से लेकर बड़े लोग भी इसकी लत के शिकार हो रहे हैं. साथ ही, ये प्लेटफॉर्म बच्चों को गलत कंटेंट भी दिखा रहे हैं, जो उनके लिए खतरनाक साबित हो रहा है.
पिछसे साल दिसंबर के महीने में ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला देश बना जाता है, जिसने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाने का ऐलान किया था. अब इसके बाद ब्रिटेन और फ्रांस जैसे कई और देश भी बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर कड़े नियम लागू करने की योजना बना रहे हैं.
फ्रांस की संसद में 15 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया पर रोक लगाने वाला कानून पारित हो रहा है. ब्रिटेन भी इसी तरह के कदम उठाने के बारे में सोच-विचार कर रहा है. हालांकि, कोई भी नया कानून बनाने और लागू करने से पहले वहां की सरकार यह देखना चाहती है कि ऑस्ट्रेलिया में सोशल मीडिया पर लगने से वहां के बच्चों को कितना लाभ मिला है.
यूरोपीय यूनियन का ‘डिजिटल सेवा कानून’ 2024 की शुरुआत से पूरी तरह लागू हो चुका है, जो सोशल मीडिया कंपनियों को गलत और हिंसात्मक पोस्ट हटाने के लिए मजबूर करता है.हालांकि, कुछ लोगों का मानना है कि इससे इंटरनेट पर सख्ती तो बढ़ेगी, लेकिन साथ ही लोगों की बोलने की आजादी छिनने या सेंसरशिप लगने का डर भी बना रहेगा.
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