नई दिल्ली : विधि मंत्रालय ने बलात्कार के मामलों की सुनवाई के लिये ‘‘विशेष’’ त्वरित अदालतों के गठन का प्रस्ताव तैयार किया है. यह इन मामलों में बेहतर जांच और तेज अभियोजन के लिये आधारभूत ढांचा मजबूत करने की वृहद योजना का हिस्सा है. गृह सचिव के साथ चर्चा के बाद विधि मंत्रालय के न्याय विभाग ने बलात्कार के मामलों में सुनवाई के लिये ‘‘विशेष त्वरित अदालतों’’ के गठन हेतु एक योजना का मसौदा तैयार किया है.Also Read - Maharashtra Cabinet ने दी Shakti Act को मंजूरी, अब रेप करने की सजा सीधे 'मौत' होगी

विभाग ने 14 जून को कैबिनेट सचिव को जानकारी दी थी कि मसौदा तैयार है और इसे विधि मंत्री की मंजूरी का इंतजार है. नई योजना हाल में लागू उस अध्यादेश का हिस्सा है जिसमें 12 वर्ष तक की बच्चियों के बलात्कार के दोषियों को मृत्युदंड का प्रावधान किया गया था. आपराधिक कानून (संशोधन) अध्यादेश के जरिये आईपीसी, सीआरपीसी, साक्ष्य अधिनियम और बाल यौन अपराध संरक्षण कानून में संशोधन हुआ था. अध्यादेश लाते हुये सरकार ने राज्यों में बलात्कार के मामलों की सुनवाई के लिये ‘‘उचित’’ संख्या में त्वरित अदालतों के गठन की योजना तैयार करने का फैसला किया था. Also Read - उन्नाव गैंगरेप केस: CBI का चार्जशीट में दावा, कुलदीप सिंह सेंगर के बाद तीन और लोगों ने किया था महिला का गैंगरेप

योजना में भौतिक आधारभूत ढांचे और अभियोजन मशीनरी को मजबूत करना, निचली अदालतों के लिये न्यायिक अधिकारियों की पर्याप्त संख्या का प्रावधान, लोक अभियोजकों, विशेष जांचकर्ताओं और विशेष फारेंसिक किटों के अतिरिक्त पदों की व्यवस्था शामिल होगी. यह प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट के सामने आने की उम्मीद है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि महिलाओं, अनुसूचित जाति- जनजाति, वंचितों तथा वरिष्ठ नागरिकों से संबंधित मामलों की सुनवाई के लिये देश में करीब 524 त्वरित अदालतें पहले से ही संचालित हो रही हैं. अधिकारी ने कहा कि अध्यादेश के तहत प्रस्तावित विशेष त्वरित अदालतें विशेष रूप से बलात्कार और बच्चों से बलात्कार के मामलों पर गौर करेंगी. Also Read - उन्नाव रेप पीड़िता की स्थिति नाजुक, अखिलेश ने कहा- BJP सरकार जिम्मेदार, 1 करोड़ रुपए मुआवजा दे

अप्रैल में सरकार ने 12 साल तक की बच्चियों के बलात्कार के दोषियों को मृत्युदंड सहित कड़ी सजा के प्रावधान वाला अध्यादेश लागू किया था. यह अध्यादेश कठुआ और सूरत में नाबालिगों के यौन उत्पीडन तथा हत्या और उन्नाव में एक लड़की के बलात्कार के मामलों को लेकर राष्ट्रव्यापी आक्रोश के बीच लाया गया था. आपराधिक विधि (संशोधन) अध्यादेश के अनुसार, नयी त्वरित अदालतें इन मामलों से निपटने के लिये गठित होंगी और सभी थानों तथा अस्पतालों को भविष्य में विशेष फारेंसिक किटें दी जायेंगी. अधिकारियों ने कहा कि सभी बलात्कार मामलों की सुनवाई पूरी करने के लिये समयसीमा दो महीने होगी. इन मामलों में अपीलों के निपटारे के लिये छह महीने की समयसीमा भी तय की गई है.