इंदौर। आध्यात्मिक गुरु भय्यूजी महाराज ने खुद को गोली मारकर खुदकुशी कर ली है. घटना के बाद उन्हें इंदौर के बॉम्बे अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उनकी मौत हो गई. बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने सिर पर गोली मारी थी. उनकी मौत पर सस्पेंस बना हुआ है और सवाल उठ रहा है कि उन्होंने खुद को गोली क्यों मारी. बीजेपी और संघ के बड़े नेताओं से नजदीकियों के चलते भय्यूजी महाराज काफी चर्चा में रहे. कुछ महीने पहले ही मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने उन्हें मंत्री का दर्जा दिया था. लेकिन उन्हें दर्जा ठुकरा दिया था. करीबी लोगों का कहना है कि वह कुछ समय से डिप्रेशन में थे.

डीआईजी हरिनारायणचारी मिश्रा ने कहा कि हमने उनके घर से एक सुसाइड नोट बरामद किया है. इसमें उन्होंने घरेलू दबाव का जिक्र किया है लेकिन तनाव क्या था इसका खुलासा नहीं हुआ है.  

इंदौर के बॉम्बे अस्पताल के महाप्रबंधक राहुल पाराशर ने बताया कि गोली लगने के बाद उन्हें तुरंत हमारे अस्पताल लाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया. इंदौर के जिलाधिकारी निशांत वरवड़े ने बताया कि अभी यह साफ नहीं हो सका है कि भय्यूजी महाराज ने किन हालात में और किस वजह से कथित तौर पर आत्महत्या की. उन्होंने कहा कि पुलिस जांच में इस बात का खुलासा हो सकेगा. वरवड़े ने कहा कि महाराज के शव को पोस्टमार्टम के लिए शासकीय महाराज यशवंत राव चिकित्सालय में भेजा गया है. घटना की जानकारी मिलने के बाद बड़ी तादात में उनके समर्थक अस्पताल के सामने इकट्ठे हो गए.

शिवराज ने जताया शोक

उनकी मौत पर बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने शोक जताया है. सीएम शिवराज सिंह ने कहा कि आज देश ने एक शख्स को खो दिया जो संस्कृति, ज्ञान और निस्वार्थ भाव सेवा के लिए जाना जाता था. नितिन गडकरी और कैलाश विजयवर्गीय सहित कई नेताओं ने उनकी मौत पर शोक जताया.


पुलिस ने बताया कि उन्होंने अपने सिर पर गोली मार ली थी. जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

मॉडल से बने संत

भय्यूजी महाराज मॉडल भी रह चुके थे. वह सियाराम शूटिंग शर्टिंग के लिए पोस्टर मॉडलिंग कर चुके थे. उनका असली नाम उदय सिंह देशमुख था. महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में लोग उन्हें भैय्यूजी महाराज के नाम से ही जानते थे. वहां उनके हजारों समर्थक हैं. वह अन्ना के करीबी भी रहे थे. उनका नाम पहली बार तब चर्चा में आया था जब उन्हें दिल्ली के जंतर मंतर पर अन्ना हजारे का अनशन तुड़वाया था. वह एमपी और महाराष्ट्र में कई सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए थे. पत्नी की मौत के बाद  पिछले साल ही उन्होंने दूसरी शादी की थी.

बीजेपी-संघ के संकटमोचक 

भय्यूजी का जन्म 29 अप्रैल 1968 को मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के शुजालपुर में हुआ था. वह सामाजिक कार्यों के लिए भी जाने जाते थे. आरएसएस और बीजेपी के आला नेताओं के साथ उनकी नजदीकियां रही. उन्हें संकटमोचक के तौर पर देखा जाता था और कई बार उन्होंने इस साबित भी किया. गुरु दक्षिण के रूप में वह लोगों से एक पौधा लगाने को कहते थे. ग्लोबल वॉर्मिंग को लेकर वह बेहद चिंतित थे. वह एक धनी व्यक्तित्व के मालिक थे और सत्ता के गलियारों में मजबूत पैठ रखने के अलावा वह खेती में दिलचस्पी रखते थे. इसके अलावा वह घुड़सवारी, तलवारबाजी में भी माहिर थे.